Dharma & Karma 

माघ महीने में तिल दान का क्या महत्व है, आज राशिफल के साथ जानिए इसकी महत्व…

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी धानिवबांग नालासोपारा पालघर महाराष्ट्र 🌹🙏
सम्पर्क सूत्र – 9518782511
🙏🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🙏
🙏🌹🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌹🙏
🙏ll जय श्री राधे ll*🙏
🙏🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🙏

दिनाँक -: 11/01/2020,शनिवार
प्रतिपदा, कृष्ण पक्ष
माघ
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि ——–प्रतिपदा 22:40:18 तक
पक्ष —————————कृष्ण
नक्षत्र ——–पुनर्वसु 13:29:04
योग ———–वैधृति 13:53:28
करण ———-बालव 11:48:10
करण ———कौलव 22:40:18
वार ————————-शनिवार
माह —————————-माघ
चन्द्र राशि —– मिथुन07:51:04
चन्द्र राशि ——————–कर्क
सूर्य राशि ———————-धनु
रितु —————————-हेमंत
सायन ————————शिशिर
आयन ——————-दक्षिणायन
सायन ———————उत्तरायण
संवत्सर ———————विकारी
संवत्सर (उत्तर) ———-परिधावी
विक्रम संवत —————-2076
विक्रम संवत (कर्तक) —-2076
शाका संवत —————-1941

मुम्बई
सूर्योदय —————–07:15:27
सूर्यास्त —————–18:17:01
दिन काल —————11:01:34
रात्री काल ————-12:58:34
चंद्रोदय —————–18:57:53
चंद्रास्त —————–31:53:54

लग्न —-धनु 26°9′ , 266°9′

सूर्य नक्षत्र —————-पूर्वाषाढा
चन्द्र नक्षत्र ——————पुनर्वसु
नक्षत्र पाया ——————–रजत

          🌹पद, चरण🌹

हा —-पुनर्वसु 07:51:04

ही —-पुनर्वसु 13:29:04

हु —- पुष्य 19:05:42

हे —- पुष्य 24:41:05

हो —-पुष्य 30:15:20

            🌹ग्रह गोचर🌹

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

सूर्य=धनु 26°32 ‘ पू oषा o, 4 ढा
चन्द्र = मिथुन 29°23’पू oषा o ‘ 3 हा
बुध = धनु 26 °10 ‘ पूoषाo’ 4 ढा
शुक्र= कुम्भ 02°55, धनिष्ठा ‘ 3 गु
मंगल=वृश्चिक 11°40′ अनुराधा ‘ 3 नू
गुरु=धनु 14°30 ‘ पू oषाo , 1 भू
शनि=धनु 26°43′ उ oषा o ‘ 1 भे
राहू=मिथुन 13 °41 ‘ आर्द्रा , 3 ङ
केतु=धनु 13 ° 41′ पूo षाo, 1 भू

   🌹शुभा$शुभ मुहूर्त🌹

राहू काल 09:50 – 11:08 अशुभ
यम घंटा 13:46 – 15:04 अशुभ
गुली काल 07:13 – 08:31 अशुभ
अभिजित 12:06 -12:48 शुभ
दूर मुहूर्त 08:36 – 09:18 अशुभ

🌹चोघडिया, दिन
काल 07:13 – 08:31 अशुभ
शुभ 08:31 – 09:50 शुभ
रोग 09:50 – 11:08 अशुभ
उद्वेग 11:08 – 12:27 अशुभ
चर 12:27 – 13:46 शुभ
लाभ 13:46 – 15:04 शुभ
अमृत 15:04 – 16:23 शुभ
काल 16:23 – 17:41 अशुभ

🌹चोघडिया, रात
लाभ 17:41 – 19:23 शुभ
उद्वेग 19:23 – 21:04 अशुभ
शुभ 21:04 – 22:46 शुभ
अमृत 22:46 – 24:27* शुभ
चर 24:27* – 26:08* शुभ
रोग 26:08* – 27:50* अशुभ
काल 27:50* – 29:31* अशुभ
लाभ 29:31* – 31:13* शुभ

नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

🌹दिशा शूल ज्ञान————-पूर्व
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो लौंग अथवा कालीमिर्च खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🚩 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

   15 + 1 + 7 + 1 = 24  ÷ 4 = 0 शेष

मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

      🌹शिव वास एवं फल🌹

16 + 16 + 5 = 37 ÷ 7 = 2 शेष

गौरि सन्निधौ = शुभ कारक

      🌹भद्रा वास एवं फल🌹

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

         🌹विशेष जानकारी🌹
  • युगल दर्शन श्री राधाबल्लभ जी वृन्दावन
  • श्री लालबहादुर पुण्य तिथि 🌹शुभ विचार🌹

अनित्यानि शरिराणि विभवो नैव शाश्वतः ।
नित्यं सन्निहितो मृत्युः कर्तव्यो धर्मसंग्रहः ।।
।।चा o नी o।।

हमारे शारीर नश्वर है. धन में तो कोई स्थायी भाव नहीं है. म्रत्यु हरदम हमारे निकट है. इसीलिए हमें तुरंत पुण्य कर्म करने चाहिए.

        🌹सुभाषितानि🌹

गीता -: श्रद्धात्रयविभागयोग अo-17

कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः।,
आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः॥,

कड़वे, खट्टे, लवणयुक्त, बहुत गरम, तीखे, रूखे, दाहकारक और दुःख, चिन्ता तथा रोगों को उत्पन्न करने वाले आहार अर्थात्‌ भोजन करने के पदार्थ राजस पुरुष को प्रिय होते हैं॥,9॥,

🌹 व्रत पर्व विवरण🌹

🌹 विशेष – प्रतिपदा को कुष्मांड (कुम्हड़ा पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

🌹सर्वफलप्रदायक माघ मास व्रत🌹
🙏🏻 पुण्यदायी स्नान सुधारे स्वभाव
माघ मास में प्रात:स्नान (ब्राम्हमुहूर्त में स्नान) सब कुछ देता है | आयुष्य लम्बा करता है, अकाल मृत्यु से रक्षा करता है, आरोग्य, रूप, बल, सौभाग्य व सदाचरण देता है | जो बच्चे सदाचरण के मार्ग से हट गये है उनको भी पुचकार के, इनाम देकर भी प्रात:स्नान कराओ तो उन्हें समझाने से, मारने-पीटने से या और कुछ करने से वे उतना नहीं सुधर सकते हैं, घर से निकाल देने से भी इतना नहीं सुधरेंगे जितना माघ मास में सुबह का स्नान करने से वे सुधरेंगे |
🙏🏻 तो माघ स्नान से सदाचार, संतानवृद्धी, सत्संग, सत्य आयर उदारभाव आदि का प्राकट्य होता है | व्यक्ति की सुरता माने समझ उत्तम गुणों से सम्पन्न हो जाती है | उसकी दरिद्रता और पाप दूर हो जाते हैं | दुर्भाग्य का कीचड़ सुख जाता है | माघ मास में सत्संग-प्रात:स्नान जिसने किया, उसके लिए नरक का डर सदा के लिए खत्म हो जाता है | मरने के बाद वह नरक में नहीं जायेगा | माघ मास के प्रात:स्नान से वृत्तियाँ निर्मल होती हैं, विचार ऊँचे होते हैं | समस्त पापों से मुक्ति होती है | ईश्वरप्राप्ति नहीं करनी हो तब भी माघ मास का सत्संग और पुण्यस्नान स्वर्गलोक तो सहज में ही तुम्हारा पक्का करा देता है | माघ मास का पुण्यस्नान यत्नपूर्वक करना चाहिए |


🙏🏻 यत्नपूर्वक माघ मास के प्रात:स्नान से विद्या निर्मल होती है | मलिन विद्या क्या है ? पढ़-लिख के दूसरों को ठगो, दारु पियो, क्लबों में जाओ, बॉयफ्रेंड – गर्लफ्रेंड करो – यह मलिन विद्या है | लेकिन निर्मल विद्या होगी तो इस पापाचरण में रूचि नहीं होगी | माघ के प्रात:स्नान से निर्मल विद्या व कीर्ति मिलती है | ‘अक्षय धन’ की प्राप्ति होती है | रूपये – पैसे तो छोड़ के मरना पड़ता है | दूसरा होता है ‘अक्षय धन’, जो धन कभी नष्ट न हो उसकी भी प्राप्ति होती है | समस्त पापों से मुक्ति और इन्द्रलोक अर्थात स्वर्गलोक की प्राप्ति सहज में हो जाती है |
🙏🏻 ‘पद्म पुराण’ में भगवान राम के गुरुदेव वसिष्ठजी कहते हैं कि ‘वैशाख में जलदान. अन्नदान उत्तम माना जाता है और कार्तिक में तपस्या, पूजा लेकिन माघ में जप, होम और दान उत्तम माना गया है |’


🌹 माघ में तिलदान 🌹
🙏🏻 माघ में तिलों का दान जरूर जरूर करना चाहिए। विशेषतः तिलों से भरकर ताम्बे का पात्र दान देना चाहिए।
🙏🏻 शिवपुराण के अनुसार “तिलदानं बलार्थं हि सदा मृत्युजयं विदुः” तिलदान बलवर्धक एवं मृत्यु का निवारक होता हैं |
🙏🏻 महाभारत अनुशासनपर्व में वर्णित तिलदान का महत्व
🌷 पितॄणां प्रथमं भोज्यं तिलाः सृष्टाः स्वयंभुवा। तिलदानेन वै तस्मात्पितृपक्षः प्रमोदते।।
माघमासे तिलान्यस्तु ब्राह्मणेभ्यः प्रयच्छति। सर्वसत्वसमाकीर्णं नरकं स न पश्यति।।
सर्वसत्रैश्च यजते यस्तिलैर्यजते पितॄन्। न चाकामेन दातव्यं तिलैः श्राद्धं कदाचन।।
महर्षेः कश्यपस्यैते गात्रेभ्यः प्रसृतास्तिलाः। ततो दिव्यं गता भावं प्रदानेषु तिलाः प्रभो।।
पौष्टिका रूपदाश्चैव तथा पापविनाशनाः। तस्मात्सर्वप्रदानेभ्यस्तिलदानं विशिष्यते।।
आपस्तम्बश्च मेधावी शङ्खश्च लिखितस्तथा। महर्षिर्गौतमश्चापि तिलदानैर्दिवं गताः।।
तिलहोमरता विप्राः सर्वे संयतमैथुनाः। समा गव्येन हविषा प्रवृत्तिषु च संस्थिताः।।
सर्वेषामिति दानानां तिलदानं विशिष्यते। अक्षयं सर्वदानानां तिलदानमिहोच्यते।।
उच्छिन्ने तु पुरा हव्ये कुशिकर्षिः परन्तपः। तिलैरग्नित्रयं हुत्वा प्राप्तवान्गतिमुत्तमाम्।।


🙏🏻 ब्रह्माजी ने जो तिल उत्पन्न किये हैं, वे पितरों के सर्वश्रेष्ठ खाद्य पदार्थ हैं। इसलिये तिल दान करने से पितरों को बड़ी प्रसन्नता होती है । जो माघ मास में ब्राह्माणों को तिल दान करता है, वह समस्त जन्तुओं से भरे हुए नरक का दर्शन नहीं करता। जो तिलों के द्वारा पितरों का पूजन करता है, वह मानो सम्पूर्ण यज्ञों का अनुष्ठान कर लेता है। तिल-श्राद्ध कभी निष्काम पुरूष को नहीं करना चाहिये । प्रभो। यह तिल महर्षि कश्‍यप के अंगों से प्रकट होकर विस्तार को प्राप्त हुए है; इसलिये दान के निमित्त इनमें दिव्यता आ गयी है। तिल पौष्टिक पदार्थ है। वे सुन्दर रूप देने वाले और पाप नाशक हैं इसलिये तिल-दान सब दानों से बढ़कर है। परम बुद्विमान महर्षि आपस्तम्ब, शंख, लिखित तथा गौतम- ये तिलों का दान करके दिव्य लोक को प्राप्त हुऐ हैं। वे सभी ब्राह्माण स्त्री-समागम से दूर रहकर तिलों का हवन किया करते थे, तिल गौर घृत के समान हवी के योग्य माने गये हैं इसलिये यज्ञों में गृहित होते हैं एवं हरेक कर्मों में उनकी आवश्‍यकता है । अतः तिल दान सब दानों से वढ़कर है। तिल दान यहां सब दानों में अक्षय फल देने वाला बताया जाता है।पूर्व काल में परंतप राजर्षि कुशिक हविष्य समाप्त हो जाने पर तिलों से ही हवन करके तीनों अग्नियों को तृप्त किया था; इससे उन्हें उत्तम गति प्राप्त हुई।
🙏🏻 ब्रह्मवैवर्तपुराण, प्रकृतिखण्ड, अध्याय 27 तथा देवीभागवतपुराण, स्कन्ध 09, अध्यायः 30 के अनुसार
🌷 तिलदानं ब्राह्मणाय यः करोति च भारते । तिलप्रमाणवर्षं च मोदते विष्णुमन्दिरे ।।
ततः स्वयोनिं संप्राप्य चिरजीवी भवेत्सुखी। ताम्रपात्रस्थदानेन द्विगुणं च फलं लभेत्।।
🙏🏻 जो भारतवर्ष में ब्राह्मण को तिलदान करता है, वह तिल के बराबर वर्षों तक विष्णुधाम में सम्मान पाता है। उसके बाद उत्तम योनि में जन्म पाकर चिरजीवी हो सुख भोगता है। ताँबे के पात्र में तिल रखकर दान करने से दूना फल मिलता है।

         🌹दैनिक राशिफल🌹

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
शत्रु भय रहेगा। वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। शत्रु परास्त होंगे। आय में वृद्धि होगी। कुसंगति से बचें। घर-परिवार से सहयोग मिलेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। शुभ समाचार मिलेंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। शारीरिक कष्ट से बाधा हो सकती है। लाभ होगा।

🐂वृष
संतान पक्ष की चिंता रहेगी। शारीरिक कष्ट से काम में रुकावट हो सकती है। वाणी पर नियंत्रण रखें। शत्रुभय रहेगा। भूमि व भवन संबंधी योजना बनेगी। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। सभी ओर से अनुकूलता रहेगी। विवेक से कार्य करें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें।

👫मिथुन
पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। किसी वरिष्ठजन का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। आय के नए स्रोत प्राप्त होंगे। जोखिम न लें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

🦀कर्क
वैवाहिक प्रस्ताव मिल सकता है। परिवार के किसी मांगलिक कार्य में भाग लेने का अवसर मिल सकता है। कोर्ट व कचहरी के कार्य मनोनुकूल रहेंगे। धन प्राप्ति सुगम होगी। व्यवसाय में उन्नति के योग हैं। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। समय का लाभ लें।

🐅सिंह
संपत्ति के बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नए उपक्रम प्रारंभ करने की योजना बनेगी। प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे। घर-बाहर अनुकूल वातावरण रहेगा। अपरिचित व्यक्ति से दूर रहें। धोखा खा सकते हैं। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें।

🙎कन्या
यात्रा मनोरंजक रहेगी। रचनात्मक कार्य पूर्ण होंगे। स्वादिष्ट भोजन का आनंद मिलेगा। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। विरोधी सक्रिय रहेंगे। व्यवसाय ठीक चलेगा। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में प्राप्त होगी। मित्रों के साथ समय अच्छा बीतेगा। लाभ होगा।

⚖तुला
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। बेरोजगारी दूर होगी। आय में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। सभी ओर से सहयोग मिलेगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। पुराना रोग उभर सकता है। लापरवाही न करें। जोखिम न लें।

🦂वृश्चिक
लेन-देन में सावधानी रखें। ऐश्वर्य पर खर्च होगा। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। विवाद को बढ़ावा न दें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। भाइयों तथा पार्टनरों से मतभेद हो सकता है। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में कमी रहेगी। जल्दबाजी न करें।

🏹धनु
बेवजह तनाव रहेगा। शारीरिक कष्ट संभव है। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। संतान पक्ष से सुख प्राप्त होगा। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी। शुभ समय।

🐊मकर
आर्थिक नीति में परिवर्तन तत्काल लाभ नहीं देगा। कार्यप्रणाली सुधरेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में वृद्धि होगी। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मित्र व संबंधी सहयोग को आगे आएंगे। कोई बड़ी समस्या से सामना हो सकता है। हिम्मत से काम लेना होगा।

🍯कुंभ
सुख के साधन जुटेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कोर्ट-कचहरी के काम अनुकूल रहेंगे। शत्रुओं की तरफ से शांति रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। समय पक्ष का है। फायदा उठाएं। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। जल्दबाजी से बचें।

🐟मीन
पुराना रोग उभर सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में लापरवाही न करें। घर में मतभेद हो सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यवसाय ठीक चलेगा। लेन-देन में सावधानी रखें। आय बढ़ेगी। दुष्टजन हानि पहुंचा सकते हैं।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

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