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तेजस के बाद ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में भाजपा सरकार…

भाजपा सरकार ने देश के रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के निजीकरण के प्रयास तेज कर दिए हैं। देश की पहली निजी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन तेजस को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने हरी झंडी दिखा चुके हैं। इसके साथ ही भाजपा सरकार ने 50 रेलवे स्टेशनों और 150 ट्रेनों का निजीकरण करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने रेलवे बोर्ड चेयरमैन विनोद कुमार यादव को एक पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है, ‘जैसा कि आप पहले से जानते हैं कि रेल मंत्रालय ने पैसेंजर ट्रेनों के संचालन के लिए निजी ट्रेन ऑपरेटरों का लाने का फैसला किया है और पहले चरण में 150 ट्रेनों को इसके तहत लेने का विचार कर रहा है।

50 रेलवे स्टेशनों के निजीकरण के बारे में कांत ने कहा कि उन्होंने इसे लेकर रेल मंत्री से विस्तार में बातचीत कर चुके हैं और इस मामले को प्राथमिकता देने की जरूरत महसूस की गई। कांत ने कहा कि इन प्रोजेक्ट के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सदस्यों, इंजीनियरिंग रेलवे बोर्ड व सदस्य और ट्रैफिक रेलवे बोर्ड को एक समूह में शामिल होना होगा। सरकार इसे देशहित में बताकर अपनी वाहवाही लूटेगी।

आपको जानकारी के लिए बता दें कि बीते 10 सालों में रेलवे को केवल कबाड़ बेचकर के 35 हजार करोड़ रुपये की कमाई हुई है। एक आरटीआई के जवाब में रेलवे ने बताया कि यह कमाई पुराने कोच, वैगन और पटरियों को बेचने से हुई है। यह कमाई पूर्वोत्तर के तीन राज्यों के सालाना बजट से भी ज्यादा है। भारतीय रेलवे ने 10 साल में कबाड़ बेचकर 35,073 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

रेलवे बोर्ड ने बीते 10 सालों में सबसे ज्यादा स्क्रैप 4,409 करोड़ रुपये का वर्ष 2011-12 में बेचा गया, जबकि सबसे कम स्क्रैप से आमदनी वर्ष 2016-17 में 2,718 करोड़ रुपये हुई है। रेलवे को केवल पुरानी पटरियों को बेचने से 10 सालों में 11,938 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। वर्ष 2009-10 से 2013-14 के बीच 6,885 करोड़ रुपये की पुरानी पटरियों को बेचा गया, वहीं वर्ष 2015-16 से 2018-19 की अवधि के बीच 5,053 करोड़ रुपये की पुरानी पटरियां बेची गईं।

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