दिल्ली में भाजपा के हार का कारण भाजपा की रणनीति या रिंकिया के पापा मनोज तिवारी…

ध्यान देने वाली बात , जीत के वोट प्रतिशत का अंतर एक प्रतिशत से भी कम रहा ,

दिल्ली उपमुख्यमंत्री #मनीष_सिसोदिया मात्र 3 हजार वोट से जीते बांकी के 30 विधायक लगभग पांच हजार या उससे कम अंतर से जीते ,

कांग्रेस के लगभग कुछेक विधायक छोडकर सभी की जमानत जब्त हो गयी

अब जो लोग सोच रहे हैं कि भाजपा की हार का कारण भाजपा की रणनीति या रिंकिया के पापा मनोज तिवारी के कारण है वो ये ना भूलें कि मनोज तिवारी को अध्यक्ष एक खास वोटरो के कारण बनाया गया है और चुनाव मे खुद अमित शाह जैसे धुरंधर जमीन में काम कर रहे थे।

कुल जमा इतना ही कहना चाहूंगा कि ये हार भाजपा मोदी की हार नही है और ना ये जीत केजरीवाल की है।

ये जान लीजिए कि ये कांग्रेस की एक रणनीति है जिसमे वो सफल रही है और ये रणनीति गणित ही एकमात्र कारगर रणनीति हैं जिसके द्वारा नरेंद्र मोदी को परास्त किया जा सकता है ,इसलिए फालतू मे भाजपा की रणनीति या किसी नेता को ना ही जनता को दोष दें।

ये चुनाव जीतने नहीं हराने के लिए लडा गया था।

कांग्रेस का एकमात्र उद्देश्य कैसे भी करके मोदी को रोंकना हैं इसका एक दो उदाहरण मै और भी दे सकता हूँ।

जहां भी भाजपा मोदी की हार की थोडी भी संभावना है वहां कांग्रेस अपने को समाप्त करने से नहीं चूकती ।
आपलोग शायद कर्नाटक भूल गये जहां हाल ही मे भाजपा सबसे बडी पार्टी थी लेकिन कांग्रेस ने कम सीटों वाली जेडीएस देवगौड़ा की पारटी का मुख्यमंत्री स्वीकार कर लिया था जबकि कांग्रेस के विधायक जेडीएस से कहीं अधिक दुगने थे।

दूसरा उदाहरण महाराष्ट्र
यहां भी भाजपा सबसे बड़ी पारटी थी और शिवशेना के साथ साथ गठबंधन में पूर्ण बहुमत प्राप्त कर चुकी थी उसके वाबजूद भी अपनी धुरविरोधी कट्टर हिंदुत्व वादी छवि वाली शिवशेना को मुख्यमंत्री पद आफर करके भाजपा को सरकार बनाने से रोंक दिया।

तीसरा उदाहरण बिहार था…
इसलिए मित्रों इतना याद रखो जितनी रणनीति और ज्ञान और ताना दे रहे हो ना उतना आसान नहीं है,
और हां 2013 से पहले देश का नागरिक कितना जागरूक परिपक्व था ये सबको पता ही है इसलिए यदि आप सोच रहे हैं कि मात्र पांच साल के अंदर ही जनता पूर्णतया परिपक्व हो जाए ये संभव नहीं । परिपक्वता आने समझ आने मे समय लगता ही है।

कांग्रेस भले इधर पांच सालों से सत्ता से गायब हो रही हो लेकिन सत्ता की चाभी आजभी उसके इर्द गिर्द ही घूमती है।

इसलिए किसी को भी दोष देना ताने मारना उचित नहीं ,
ये बस समय का खेल है।

खैर जो होता है अच्छे के लिए होता है।

आंगे देखिए और आपस मे मत लडिए और ना ही अपने लोंगो को ताना मारकर निराश करिए।

पिछली बार जब केजरीवाल जीते थे तब हरे गुब्बारों और नमाजियों से घिरे थे लेकिन इस बार जीतने के बाद हनुमान मंदिर गये हनुमान चालीसा पढा और नरेंद्र मोदी को इस चुनाव मे भूलकर भी अपशब्द नहीं कहा ।

और अब जीतने के बाद बयान दिया कि हम नरेंद्र मोदी जी के साथ मिलकर विकास करेंगे ।

उनको भी हमारी जमीन का अंदाजा हो गया है ।
वो अब हमारे ही एजेंडे पर हमारी बनाई जमीन पर चुनाव लड रहे हैं यही बहुत है ।
आप और कांग्रेस एक होकर भी अंतिम समय मे भयभीत हो गये थे यही आपकी हमारी ताकत का प्रमाण है ।
इसलिए फालतू की छींटाकशी से बचें ।

होईहें वही जो राम रचि राखा….

और क्वीन सोनिया गांधी की कांग्रेस को कमजोर समझने की भूल कतयी ना करें वो बहुत चालांक डायन है जो डूब रही है तो सामने वाले को भी डुबा देने की पूरी कोशिश में है ।

और हां इस पूरे चुनाव में किसी का सर्वाधिक उपयोग किया गया है तो वो मुसलमान समाज का किया गया है।

रवि मिश्रा (मीरा भायंदर)

Spread the love

Written by 

Related Posts

Leave a Comment

3 × 5 =

WhatsApp chat