Dharma & Karma (ज्योतिष शास्त्र) 

क्या आप हरितालिका तीज ब्रत की विशेषता के बारे में जानते हैं? आज तीज ब्रत है,और…

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी धानिवबांग नालासोपारा पालघर महाराष्ट्र 🌸🙏🌸
सम्पर्क सूत्र – 9518782511
🙏🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🙏
🙏🌸🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌸🙏
🙏ll जय श्री राधे ll*🙏
🙏🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🙏

दिनाँक-: 21/08/2020,शुक्रवार
तृतीया, शुक्ल पक्ष
भाद्रपद
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि ———तृतीया 23:02:18 तक
पक्ष —————————-शुक्ल
नक्षत्र ——–उ०फा० 21:27:58
योग ————-सिद्ध 13:59:36
करण ———–तैतुल 12:37:24
करण ————–गर 23:02:18
वार ————————-शुक्रवार
माह ———————— भाद्रपद
चन्द्र राशि ——————-कन्या
सूर्य राशि ——————— सिंह
रितु —————————–वर्षा
आयन —————– दक्षिणायण
संवत्सर ———————–शार्वरी
संवत्सर (उत्तर)————- प्रमादी
विक्रम संवत ————— 2077
विक्रम संवत (कर्तक) —-2076
शाका संवत —————-1942

मुम्बई
सूर्योदय —————- 06:22:13
सूर्यास्त —————–19:00:31
दिन काल ————–12:38:17
रात्री काल ————-11:21:56
चंद्रोदय —————- 08:23:59
चंद्रास्त —————–21:03:17

लग्न —-सिंह 4°18′ , 124°18′

सूर्य नक्षत्र ——————–मघा
चन्द्र नक्षत्र ———उत्तराफाल्गुनी
नक्षत्र पाया ——————-रजत

🙏🌸पद, चरण🌸🙏

टो —- उत्तरा फाल्गुनी 10:38:58
पा —-उत्तरा फाल्गुनी 16:03:24
पी —-उत्तरा फाल्गुनी 21:27:58
पू —-हस्त 26:52:47

राहू काल 10:45 – 12:22 अशुभ
अभिजित 11:56 -12:48 शुभ

🌸 चोघडिया, दिन
चर 05:54 – 07:31 शुभ
लाभ 07:31 – 09:08 शुभ
अमृत 09:08 – 10:45 शुभ
काल 10:45 – 12:22 अशुभ
शुभ 12:22 – 13:59 शुभ
रोग 13:59 – 15:36 अशुभ
उद्वेग 15:36 – 17:13 अशुभ
चर 17:13 – 18:50 शुभ

🌸 चोघडिया, रात
रोग 18:50 – 20:13 अशुभ
काल 20:13 – 21:36 अशुभ
लाभ 21:36 – 22:59 शुभ
उद्वेग 22:59 – 24:22* अशुभ
शुभ 24:22* – 25:45* शुभ
अमृत 25:45* – 27:08* शुभ
चर 27:08* – 28:32* शुभ
रोग 28:32* – 29:55* अशुभ

🌸 दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🌸 अग्नि वास ज्ञान
3 + 6 + 1 = 10 ÷ 4 = 2 शेष
आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

🌸 शिव वास एवं फल
3 + 3 + 5 = 11 ÷ 7 = 4 शेष
सभायां = सन्ताप कारक

*🌸विशेष जानकारी🌸*
  • हरि तालिका व्रत
  • केवड़ा तीज
  • वराह जयन्ती
  • गौरि व्रत (उड़ीसा) 🙏🌸शुभ विचार🌸🙏

पठन्ति चतुरो वेदान् धर्मशास्त्राण्यनेकशः ।
आत्मानं नैव जानन्ति दवी पाकरसं यथा ।।
।।चा o नी o।।

एक व्यक्ति को चारो वेद और सभी धर्मं शास्त्रों का ज्ञान है. लेकिन उसे यदि अपने आत्मा की अनुभूति नहीं हुई तो वह उसी चमचे के समान है जिसने अनेक पकवानों को हिलाया लेकिन किसी का स्वाद नहीं चखा.

*🌸सुभाषितानि🌸*

गीता -: राजविद्याराजगुह्ययोग अo-09

त्रैविद्या मां सोमपाः पूतपापायज्ञैरिष्ट्‍वा स्वर्गतिं प्रार्थयन्ते।,
ते पुण्यमासाद्य सुरेन्द्रलोकमश्नन्ति दिव्यान्दिवि देवभोगान्‌ ॥,

तीनों वेदों में विधान किए हुए सकाम कर्मों को करने वाले, सोम रस को पीने वाले, पापरहित पुरुष (यहाँ स्वर्ग प्राप्ति के प्रतिबंधक देव ऋणरूप पाप से पवित्र होना समझना चाहिए) मुझको यज्ञों के द्वारा पूजकर स्वर्ग की प्राप्ति चाहते हैं, वे पुरुष अपने पुण्यों के फलरूप स्वर्गलोक को प्राप्त होकर स्वर्ग में दिव्य देवताओं के भोगों को भोगते हैं॥,20॥,

🌸 ब्रत पर्व विवरण🌸

हरितालिका तीज ब्रत
विशेष – तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला होता है।

🌸हरितालिका ब्रत कथा🌸
ॐ श्रीसूतजी ने कहा कि मंदार माला से श्रीगौरी के केश अलंकृत हैं मुंडों की माला से श्रीशिव की जटा अलंकृत हैं श्रीगौरी दिव्य वस्त्र धारण किये श्रीशिव दिगम्बर हैं ऐसी श्रीगौरीशंकर को प्रणाम करता हूँ । सुंदर कैलाश पर्वत के शिखर पर बैठी श्रीपार्वती कहती हैं हे श्रीमहेश्वर हमे कोई गुप्त व्रत पूजन बताये । जो सब धर्मों में सरल कम परिश्रम करना पड़े एवं फल अधिक मिले हे नाथ आप मुझ पर प्रसन्न हो तो वह विधान बताये। हे नाथ किस तप व्रत दान से आदि मध्य अंत रहित आप जैसे महाप्रभु मुझे मिले। श्रीशिव बोले हे देवी सुनो मैं तुम्हें एक उत्तम व्रत मेरा सर्वस्व छिपाने योग्य तुम्हारे प्रेम से वशीभूत हो कहता हूँ । नक्षत्रों में चंद्र ग्रहों में सूर्य वर्णों में ब्राह्मण देवों मे विष्णु नदियों में गंगा पुराणों में महाभारत वेदों मे सामवेद इन्द्रियों में मन श्रेष्ठ हैं । सब पुराण स्मृतियों में जिस तरह कहा मैं तुम्हें एक प्राचीन व्रत बताता हूँ एकाग्र मन से सुनो। जिस व्रत से तुमने मेरा आधा आसन पाया वह तुम्हें कहूँ तुम मेरी प्रेयसी हो । भाद्रपद मास में हस्त नक्षत्रयुक्त सुदी तीज तिथि को अनुष्ठान से स्त्रियाँ पापमुक्त होती हैं । हे देवी तुमने बहुत दिनों पहले हिमालय पर्वत पर इस व्रत को किया था । वह वृतांत कहूँ । श्रीपार्वती ने पूछा हे नाथ मैने यह व्रत क्यों किया? यह आपके मुख से सुनना चाहती हूँ । श्रीशिव ने कहा कि भारत के उत्तर में सुंदर पर्वत में श्रेष्ठ हिमवान पर्वत है। उसके आसपास भूमि में अनेक वृक्ष हैं अनेक पशु पक्षी उस पर रहते हैं वहाँ गन्धर्वों के साथ देवता सिद्ध चारण पक्षी गण सदैव प्रसन्न मन से विचारते हैं वहाँ गन्धर्व गाते अप्सराएँ नृत्य करती उस पर्वत के शिखर जिनमे स्फटिक रत्नादि की खाने भरी हैं । वह पर्वत ऊँचा आकाश छूता बर्फ से ढँका हैं वहाँ श्रीगंगाजल ध्वनि सुनाई देती हैं। हे देवी तुमने बाल्यकाल में पर्वत पर तपस्या की थी 12 वर्ष उल्टी टँगकर धुँआ पीकर रही वैशाख की दोपहरी में पंचाग्नि तापती रही। श्रावण में बरसते जल में भूखी प्यासी मैदान में बैठी रही तुम्हारे पिता तुम्हे इन कष्टों को सहन नही करते हुए तुम्हें देख दुःखी हुए । वे चिन्ता में होकर अपनी कन्या किसे दूँ उसी समय तब श्रीनारद तुम्हें देखने गये हिमाचल ने श्रीनारद अर्ध्य पाद्यादि से स्वागत कर श्रीनारद से पूछा आप किसलिए आये? आपका आना अच्छा हैं श्रीनारद ने कहा कि श्रीविष्णु का भेजा आया हूँ आपकी कन्या योग्य वर को दे । श्रीविष्णु के समान श्रीइन्द्रादि कोई भी वर नही हैं इसलिए आप आपकी कन्या श्रीविष्णु को दे । हिमालय ने कहा कि श्रीविष्णु मेरी कन्या लेना चाहते हैं आप संदेश लेकर आये तो उन्हें कन्या दूँगा तब श्रीनारद चले गये। वे पीताम्बर शंख चक्र गदा धारी श्रीविष्णु के पास गये 1श्रीनारद ने करबद्ध श्रीविष्णु से कहा आपका विवाह पक्का कर आया। हिमालय ने श्रीपार्वती से कहा मैंने तुम्हें श्रीविष्णु को दे दिया । तब पिता की बात सुन निरुत्तर हो सखी के घर गयी भूमि पर पड़ दुःखी हो विलाप करने लगी तुम्हारा विलाप सुन सखी बोली आपके दुःख का कारण कहो ।आपकी इच्छा पूरी करने की चेष्टा करुँगी। श्रीपार्वती ने कहा मेरी इच्छा सुनो मैं एक श्रीशिव को ही पति बनाना चाहती हूँ इसमें संशय नही हैं । मेरे पिता ने मेरी इच्छा ठुकरा दी । अब मैं शरीर त्याग दूँ । श्रीपार्वती की बात सुन सखियों ने कहा कि शरीर मत त्यागो हम वन में चले जहाँ आपके पिता को पता न चले तब तुम सखी के साथ वन में गयी । पिता तुम्हे घर घर खोजने लगे दूतों द्वारा खबर लेने लगे कि कौन देव राक्षस आदि मेरी कन्या को हर ले गया। मैंने श्रीनारद के आगे प्रतिज्ञा करी की कन्या श्रीविष्णु को दूँगा ऐसा सोच बेहोश हो गये । गिरिराज को बेहोश देख लोग दौड़े होश आने पर पूछा आपकी बेहोशी का कारण कहो । हिमवान ने कहा मेरे दुःख का कारण सुनो मेरी कन्या को कोई हर ले गया या काले साँप ने काट लिया या शेर बाघ खा गये हाय हाय मेरी बेटी कहाँ गयी? किस दुष्ट ने मेरी पुत्री को मारा हिमवान वायु के झोंके की तरह काँपने लगे । फिर तुम्हारे पिता वन वन ढूँढने लगे वन शेर आदि से भयानक लगा तुम भी सखी के साथ एक जगह गयी जहाँ नदी बह रही वहाँ एक गुफ़ा में मेरी बालू की मूर्ति बना निराहार रह आराधना करी जब भाद्रपद सुदी हस्त नक्षत्र युक्त तीज आई तब मेरी पूजा कर रात भर गीत वाद्यादि से गाकर जागरण कर मुझे प्रसन्न करने मे बिताया । तुम्हारे व्रतराज से मेरा आसन डोला मैं उस स्थान पर आया जहाँ तुम सखी के साथ व्रत कर रही । मैंने तुमसे कहा कि मैं तुम पर प्रसन्न हूँ बोलो क्या चाहती हो? तुमने कहा आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे पति बने मेरे द्वारा तथास्तु कह कर कैलाश पर्वत पर वापस आने पर वह बालू की मूर्ति नदी में प्रवाहित कर दी । सखी के साथ महाव्रत का पारण किया । हिमवान तुम्हें खोजते वन में आ गये सभी दिशाओं में तुम्हें खोजने से घबरा कर गिर गये।थोड़ी देर बाद उन्होंने नदी तट पर दो कन्यायें देखी फिर तुम्हें देख छाती से लगा रोने लगे फिर आपसे पूछा कि इस भयानक वन में क्यो आई? आपने कहा कि मैं अपने को श्रीशिव को सोप चुकी आपने मेरी बात टाली। इस कारण यहाँ आई। हिमवान ने कहा आपकी इच्छा के विरुद्ध कुछ नही करुँगा तुम्हें अपने साथ घर लाकर मेरे साथ तुम्हारा विधि विधान से शुभ विवाह कर दिया । इसी से आपने मेरा अर्धासन पाया तब आज तक यह व्रत प्रकट करने का अवसर मुझे नही आया । हे देवी इस व्रत का नाम हरितालिका क्यों पड़ा? तुमको सखी हर ले गयी थी इसी से श्रीहरतालिका नाम पड़ा । श्रीपार्वती ने कहा हे नाथ आपने नाम तो बताया अब व्रत विधि पुण्य फल एवं व्रत कौन करे? यह भी बताये। श्रीशिव ने कहा हे देवी स्त्री जाति की भलाई हेतु यह व्रत हैं जो स्त्री सौभाग्य की रक्षा चाहती वह व्रत करे। केले के खम्भे का मंडप बना रेशमी वस्त्रों की झाँकी बना चंदन से सुगंध कर वाद्यों को बजाते मंगल गाते मंडप में श्रीशिवपार्वती की मूर्ति स्थापित करे। उस दिन उपवास रख बहुत सुगन्धित द्रव्यों से पूजन नैवेद्य लगा रात भर जागरण करे। ऋतु के पत्ते फलादि विशेष रखे । हे श्रीशिवे अर्थ दात्री शिवरुपिणी ब्रह्मरुपिणी जगद्धात्री आपको प्रणाम हैं । हे सिंहवाहिनी संसार भय से मुझ दीन की रक्षा करो इस इच्छा से आपकी पूजा की हैं । हे श्रीपार्वती मुझे राज्य एवं सौभाग्य दो प्रसन्न हो मुझ पर प्रसन्न हो। इन्हीं मंत्रों से श्रीपार्वती की पूजा करे। पति सहित पूजन कर कथा सुन दानादि संकल्प कर देवे । हे देवी जो स्त्री इस प्रकार पूजा करती वह पापों से छूट सात जन्म तक सुख सौभाग्य लेती हैं । जो स्त्री तीज को व्रत नही कर अन्न खाती वह सात जन्म तक बाँझ रह बार बार विधवा होना पड़ता हैं वह गरीब पुत्र शोक से दुःखी लड़ाकू दुःखी होती हैं उपवास नही करने वाली स्त्री नरक में जाती हैं । तीज को अन्न खाने से सूकरी फल खाने से बंदरिया पानी पीने से जोंक दूध पीने से नागिन मांस खाने से बाघिन मिठाई खाने से चींटी सभी वस्तुओं को खाने से मक्खी होती हैं सोने से अजगरी पति को धोखा देने मुर्गी होती हैं चौथ को दान कर व्रत पारण करे। जो स्त्री ऐसा व्रत करे वह मेरे समान पति पाकर मरने पर तुम्हारे समान उसका रुप हो जाता है। उस स्त्री को सुख एवं मोक्ष मिल जाता हैं यह श्रीहरतालिका व्रत कथा सुनने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ सौ वाजपेय यज्ञ का फल मिलता हैं मैंने यह उत्तम व्रत बताया जिसको करके प्राणी पापों से छूट जाता हैं इसमें संशय नही हैं । भगवान श्रीशिव ने श्रीपार्वती को उनका पूर्व जन्म का स्मरण कराने हेतु यह श्रीहरतालिका तीज व्रत पूजन कथा कही थी।

*🌸दैनिक राशिफल🌸*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
कार्य की प्रशंसा होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। प्रसन्नता रहेगी। संतान की शिक्षा की चिंता समाप्त होगी। व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। महत्व के कार्य को समय पर करें। व्यावसायिक श्रेष्ठता का लाभ मिलेगा। मेहनत का फल कम मिलेगा।

🐂वृष
बुरी खबर मिल सकती है। दौड़धूप अधिक होगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। थकान रहेगी। व्यापार-व्यवसाय संतोषप्रद रहेगा। आपसी संबंधों को महत्व दें। अल्प परिश्रम से ही लाभ होने की संभावना है। खर्चों में कमी करने का प्रयास करें। अति व्यस्तता रहेगी।

👫मिथुन
किसी आनंदोत्सव में भाग लेने का मौका मिलेगा। बौद्धिक कार्य सफल रहेंगे। लाभ होगा। धन संचय की बात बनेगी। परिवार के कार्यों पर ध्यान देना जरूरी है। रुका कार्य होने से प्रसन्नाता होगी। आर्थिक सलाह उपयोगी रहेगी। कर्ज की चिंता कम होगी।

🦀कर्क
संपत्ति के कार्य लाभ देंगे। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। प्रसन्नता रहेगी। प्रमाद न करें। धैर्य एवं शांति से वाद-विवादों से निपट सकेंगे। दुस्साहस न करें। नए विचार, योजना पर चर्चा होगी। स्वयं की प्रतिष्ठा व सम्मान के अनुरूप कार्य हो सकेंगे।

🐅सिंह
राजकीय सहयोग प्राप्त होगा। प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। व्यवसाय ठीक चलेगा। प्रमाद न करें। जायदाद संबंधी समस्या सुलझने के आसार बनेंगे। अनुकूल समाचार मिलेंगे तथा दिन आनंदपूर्वक व्यतीत होगा। नए संबंध लाभदायी सिद्ध होंगे।

🙎‍♀️कन्या
कुसंगति से हानि होगी। वाहन मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। वाणी पर नियंत्रण रखें, जोखिम न लें। परेशानियों का मुकाबला करके भी लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे। व्यापारिक लाभ होगा। संतान के प्रति झुकाव बढ़ेगा। शिक्षा व ज्ञान में वृद्धि होगी।

⚖️तुला
चोट व रोग से बचें। कानूनी अड़चन दूर होगी। धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। प्रसन्नता रहेगी। क्रय-विक्रय के कार्यों में लाभ होगा। योजनाएं बनेंगी। उच्च और बौद्धिक वर्ग में विशेष सम्मान प्राप्त होगा। भाइयों से अनबन हो सकती है। अपनी वस्तुएं संभालकर रखें।

🦂वृश्चिक
मेहनत का फल मिलेगा। योजना फलीभूत होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। प्रतिष्ठा बढ़ेगी। कर्ज से दूर रहना चाहिए। खर्च में कमी होगी। कानूनी विवादों का निपटारा आपके पक्ष में होने की संभावना है। प्रतिष्ठितजनों से मेल-जोल बढ़ेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

🏹धनु
विवाद से क्लेश होगा। फालतू खर्च होगा। पुराना रोग परेशान कर सकता है। जोखिम न लें। जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। विद्यार्थियों को परीक्षा में सफलता प्राप्ति के योग हैं। सावधानी व सतर्कता से व्यापारिक अनुबंध करें। दांपत्य जीवन अच्छा रहेगा।

🐊मकर
यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। रोजगार मिलेगा। अप्रत्याशित लाभ संभव है। जोखिम न लें। धर्म के कार्यों में रुचि आपके मनोबल को ऊंचा करेगी। मिलनसारिता व धैर्यवान प्रवृत्ति जीवन में आनंद का संचार करेगी। कई दिनों से रुका पैसा मिल सकेगा।

🍯कुंभ
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। यात्रा, नौकरी व निवेश मनोनुकूल रहेंगे। जोखिम न उठाएं। आज का दिन आपके लिए शुभ रहने की संभावना है। स्थायी संपत्ति में वृद्धि होगी। रोजगार के अवसर मिलेंगे। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा।

🐟मीन
व्यवसाय ठीक चलेगा। पुराने मित्र व संबंधियों से मुलाकात होगी। व्यय होगा। प्रसन्नता रहेगी। व्यापार में नए अनुबंध लाभकारी रहेंगे। परिश्रम का अनुकूल फल मिलेगा। परिजनों के स्वास्थ्य और सुविधाओं की ओर ध्यान दें।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

Spread the love

Written by 

Related Posts

Leave a Comment

one × one =

WhatsApp chat