Dharma & Karma 

कृष्ण जन्माष्टमी तो सब जानते हैं, राधा अष्टमी क्या है आप जानते हैं?

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी
सम्पर्क सूत्र +91 9518782511
🙏🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🙏
🌹🌷🌹|| जय श्री राधे ||🌹🌷🌹
🙏🌷🙏अथ पंचांगम्* 🙏🌷🙏
ll जय श्री राधे ll
🙏🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🙏

Presents

दिनाँक -: 06/09/2019,शुक्रवार
अष्टमी, शुक्ल पक्ष
भाद्रपद
“””””””””””””””””””””””””””””””‘”‘”””(समाप्ति काल)

तिथि————-अष्टमी20:42:57 तक
पक्ष—————————–शुक्ल
नक्षत्र————-ज्येष्ठा28:57:17
योग———–विश्कुम्भ17:24:51
करण———विष्टि भद्र08:40:11
करण—————भाव20:42:57
वार—————————शुक्रवार
माह————————–भाद्रपद
चन्द्र राशि——-वृश्चिक28:57:17
चन्द्र राशि————————धनु
सूर्य राशि————————सिंह
रितु——————————-वर्षा
आयन——————-दक्षिणायण
संवत्सर———————-विकारी
संवत्सर (उत्तर)———–परिधावी
विक्रम संवत—————–2076
विक्रम संवत (कर्तक)——-2075
शाका संवत——————1941

मुम्बई
सूर्योदय—————–06:25:25
सूर्यास्त——————18:48:11
दिन काल—————12:32:22
रात्री काल————–11:28:04
चंद्रोदय——————13:05:57
चंद्रास्त——————24:30:11

लग्न—-सिंह 19°2′ , 139°2′

सूर्य नक्षत्र————-पूर्वाफाल्गुनी
चन्द्र नक्षत्र———————ज्येष्ठा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र

🌹🌷🌹 पद, चरण 🌹🌷🌹

नो—-ज्येष्ठा 10:16:24

या—-ज्येष्ठा16:27:12

यी—-ज्येष्ठा 22:40:52

यू—-ज्येष्ठा 28:57:17

🌹🌷🌹 ग्रह गोचर 🌹🌷🌹

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

सूर्य=सिंह 19°42 ‘ पू o फा o, 2 टा
चन्द्र =वृश्चिक 19°23 ‘ ज्येष्ठा ‘ 1 नो
बुध=सिंह 20°16 ‘पू o फ़ा o’ 3 टी
शुक्र= सिंह 25 ° 10, पू oफा o’ 4 टू
मंगल=सिंह 17°12 ‘ पू oफ़ा o ‘ 2 टा
गुरु=वृश्चिक 20°48 ‘ ज्येष्ठा , 2 या
शनि=धनु 22°13′ पू oषा o ‘ 3 फा
राहू=मिथुन 20°25 ‘ पुनर्वसु , 1 के
केतु=धनु 20 ° 25′ पूo षाo, 3 फा

🌹🌷🌹शुभा$शुभ मुहूर्त🌹🌷🌹

राहू काल 10:43 – 12:17अशुभ
यम घंटा 15:26 – 16:59अशुभ
गुली काल 07:35 – 09:09अशुभ
अभिजित 11:52 -12:43शुभ
दूर मुहूर्त 08:32 – 09:22अशुभ
दूर मुहूर्त 12:43 – 13:33अशुभ

🌼गंड मूलअहोरात्रअशुभ

🌼चोघडिया, दिन
चर 06:01 – 07:35शुभ
लाभ 07:35 – 09:09शुभ
अमृत 09:09 – 10:43शुभ
काल 10:43 – 12:17अशुभ
शुभ 12:17 – 13:52शुभ
रोग 13:52 – 15:26अशुभ
उद्वेग 15:26 – 16:59अशुभ
चर 16:59 – 18:34शुभ

🌹चोघडिया, रात
रोग 18:34 – 19:59अशुभ
काल 19:59 – 21:26अशुभ
लाभ 21:26 – 22:52शुभ
उद्वेग 22:52 – 24:18अशुभ शुभ 24:18 – 25:44शुभ अमृत 25:44 – 27:10शुभ चर 27:10 – 28:36शुभ रोग 28:36 – 30:02*अशुभ

🌼होरा, दिन
शुक्र 06:01 – 07:04
बुध 07:04 – 08:07
चन्द्र 08:07 – 09:09
शनि 09:09 – 10:12
बृहस्पति 10:12 – 11:15
मंगल 11:15 – 12:17
सूर्य 12:17 – 13:20
शुक्र 13:20 – 14:23
बुध 14:23 – 15:26
चन्द्र 15:26 – 16:28
शनि 16:28 – 17:31
बृहस्पति 17:31 – 18:34

🌼होरा, रात
मंगल 18:34 – 19:31
सूर्य 19:31 – 20:28
शुक्र 20:28 – 21:26
बुध 21:26 – 22:23
चन्द्र 22:23 – 23:20
शनि 23:20 – 24:18
बृहस्पति 24:18* – 25:15
मंगल 25:15* – 26:12
सूर्य 26:12* – 27:10
शुक्र 27:10* – 28:07
बुध 28:07* – 29:04
चन्द्र 29:04* – 30:02

नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

🌼दिशा शूल ज्ञान————-पश्चिम
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🌼 अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

  8 + 6 + 1 = 15 ÷ 4 = 3 शेष

पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

🌼 शिव वास एवं फल -:

8 + 8 + 5 = 21÷ 7 = 0शेष

शमशान भूमि = मृत्यु कारक

🌹भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

प्रातः 08:45 तक समाप्त

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

🌹🌷🌹विशेष जानकारी 🌹🌷🌹

  • श्री राधाष्टमी महा पर्व (राधाकुण्ड स्नान)
  • दधीच जयंती
  • श्री हरिदास जयंती
  • भवरवन परिक्रमा (मेला गरुण गोविंद जी)

🌹🌷🌹 शुभ विचार 🌹🌷🌹

प्रत्युत्थानञ्च युध्द्ञ्च संविभागञ्च बन्धुषु ।
स्वयमाक्रम्यभुक्तञ्चशिक्षेच्चत्वारिकुक्कुटात् ।।
।।चा o नी o।।

मुर्गे से हे चार बाते सीखे…
१. सही समय पर उठे.
२. नीडर बने और लढ़े.
३. संपत्ति का रिश्तेदारों से उचित बटवारा करे.
४. अपने कष्ट से अपना रोजगार प्राप्त करे.

🌹🌷🌹 सुभाषितान🌹🌷🌹

गीता -: भक्तियोग अo-12

अनपेक्षः शुचिर्दक्ष उदासीनो गतव्यथः।,
सर्वारम्भपरित्यागी यो मद्भक्तः स मे प्रियः॥,

जो पुरुष आकांक्षा से रहित, बाहर-भीतर से शुद्ध (गीता अध्याय 13 श्लोक 7 की टिप्पणी में इसका विस्तार देखना चाहिए) चतुर, पक्षपात से रहित और दुःखों से छूटा हुआ है- वह सब आरम्भों का त्यागी मेरा भक्त मुझको प्रिय है॥,16॥,

🌹🌷🌹दैनिक राशिफल🌹🌷🌹

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। कारोबार में वृद्धि होगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड इत्यादि मनोनुकूल लाभ देंगे। विरोधी सक्रिय रहेंगे। शारीरिक कष्ट संभव है। अज्ञात भय रहेगा। विवाद से बचें। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। प्रमाद न करें।

🐂वृष
नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य संबंधी चिंता रहेगी। शत्रुभय रहेगा। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। नौकरी में नए कार्य प्राप्त हो सकते हैं। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। प्रसन्नता रहेगी।

👫मिथुन
बुद्धि का प्रयोग करें। चिंता रहेगी। धर्म-कर्म में रुचि रहेगी। कोर्ट-कचहरी व सरकारी कार्यालयों में रुके कार्य मनोनुकूल रहेंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। विवाद से क्लेश संभव है। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। तीर्थयात्रा का कार्यक्रम बन सकता है।

🦀कर्क
धनहानि हो सकती है। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। शारीरिक कष्ट हो सकता है। जल्दबाजी व लापरवाही न करें। विवाद से क्लेश हो सकता है। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। नौकरी में कार्यभार रहेगा। जवाबदारी बढ़ सकती है।

🐅सिंह
जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। प्रेम-प्रसंग अनुकूल रहेंगे। कोर्ट-कचहरी व सरकारी कार्यालयों में अटके काम पूरे हो सकते हैं। धन प्राप्ति सुगम होगी। किसी विशेष कार्य के बारे में चिंता रहेगी। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। मातहतों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।

🙍कन्या
शत्रु पस्त होंगे। प्रतिद्वंद्विता में कमी होगी। पार्टनरों का सहयोग प्राप्त होगा। भूमि व भवन संबंधी कार्य लाभदायक रहेंगे। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। कारोबारी बड़े सौदे हो सकते हैं। बड़ा लाभ होगा। चिंता में कमी रहेगी।

⚖तुला
परिवार के एकाधिक सदस्यों की चिंता रहेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। चोट व रोग से कष्ट संभव है। पार्टी व पिकनिक का कार्यक्रम बन सकता है। विद्यार्थी वर्ग अपने कार्य में सफलता प्राप्त करेंगे। नौकरी में नया काम हो सकता है। धन प्राप्ति सुगम होगी। प्रसन्नता बनी रहेगी।

🦂वृश्चिक
पुराना रोग उभर सकता है। कीमती वस्तुएं गुम हो सकती हैं, संभालकर रखें। दु:खद समाचार की प्राप्ति संभव है। भागदौड़ अधिक रहेगी। लाभ के अवसर हाथ से निकल सकते हैं। प्रयास अधिक करना पड़ेंगे। प्रतिद्वंद्वी शांत रहेंगे, धैर्य रखें।

🏹धनु
किसी अनहोनी के होने की चिंता रहेगी। स्वास्थ्य पर खर्च हो सकता है। पुराने किए गए प्रयासों का फल अब मिल सकता है। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। धन प्राप्ति सुगम होगी।

🐊मकर
घर में वृद्ध व्यक्तियों के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। नेत्र पीड़ा हो सकती है। दूर से शुभ समाचारों की प्राप्ति होगी। आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। घर में अतिथियों का आगमन होगा। नए मित्र बन सकते हैं। कोई बड़ा कार्य करने की इच्छा होगी।

🍯कुंभ
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। रोजगार प्राप्ति के प्रयास सफल रहेंगे। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। किसी बड़ी समस्या से निजात मिल सकती है। शरीर के ऊपरी हिस्से में कष्ट हो सकता है। जल्दबाजी न करें।

🐟मीन
राज्य की तरफ से दिक्कत हो सकती है। विवाद करने व जल्दबाजी से बचें। नेत्र पीड़ा हो सकती है। स्वास्थ्य पर व्यय होगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। आर्थिक समस्या रहेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्यापार ठीक चलेगा।

🌹व्रत पर्व विवरण🌹

राधाष्टमी, दधीचि ऋषि जयंती, महालक्ष्मी व्रतारम्भ, गौरी पूजन*
🌼 विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)
💥 अष्टमी तिथि के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)
राधा अष्टमी* 🌷
🙏🏻 06 सितम्बर, शुक्रवार को श्रीराधा अष्टमी है। जन्माष्टमी के पूरे 15 दिन बाद ब्रज के रावल गांव में राधा जी का जन्म हुआ । कहते हैं कि जो राधा अष्टमी का व्रत नहीं रखता, उसे जन्माष्टमी व्रत का फल नहीं मिलता। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी व्रत रखा जाता है। पुराणों में राधा-रुक्मिणी को एक ही माना जाता है। जो लोग राधा अष्टमी के दिन राधा जी की उपासना करते हैं, उनका घर धन संपदा से सदा भरा रहता है। राधा अष्टमी के दिन ही महालक्ष्मी व्रत का आरंभ होता है।
पुराणों के अनुसार राधा अष्टमी
🙏🏻 स्कंद पुराण के अनुसार राधा श्रीकृष्ण की आत्मा हैं। इसी कारण भक्तजन सीधी-साधी भाषा में उन्हें ‘राधारमण’ कहकर पुकारते हैं।
🙏🏻 पद्म पुराण में ‘परमानंद’ रस को ही राधा-कृष्ण का युगल-स्वरूप माना गया है। इनकी आराधना के बिना जीव परमानंद का अनुभव नहीं कर सकता।
🙏🏻 भविष्य पुराण और गर्ग संहिता के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी पर अवतरित हुए, तब भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन महाराज वृषभानु की पत्नी कीर्ति के यहां भगवती राधा अवतरित हुई। तब से भाद्रपद शुक्ल अष्टमी ‘राधाष्टमी’ के नाम से विख्यात हो गई।
🙏🏻 नारद पुराण के अनुसार ‘राधाष्टमी’ का व्रत करनेवाला भक्त ब्रज के दुर्लभ रहस्य को जान लेता है।
🙏🏻 पद्म पुराण में सत्यतपा मुनि सुभद्रा गोपी प्रसंग में राधा नाम का स्पष्ट उल्लेख है। राधा और कृष्ण को ‘युगल सरकार’ की संज्ञा तो कई जगह दी गई है।
मनोकामनापूर्ति योग 🌷
🙏🏻 देवी भागवत में व्यास भगवान ने बताया है…. भाद्रपद मास, शुक्ल नवमी तिथि हो ….. उस दिन अगर कोई जगदंबाजी का पूजन करता है, तो उसकी मनोकामनायें पूर्ण होती है , और जिंदगी जब तक उसकी रहेगी वो सुखी और संपन्न रहेगा | और वो दिन 07 सितम्बर 2019 शनिवार को है, इस दिन ए मंत्र का जप करें……
🌷 ॐ अम्बिकाय नम :
🌷 ॐ श्रीं नम :
🌷 ॐ ह्रीं नम:
🌷 ॐ पार्वेत्येय नम :
🌷 ॐ गौराये नम :
🌷 ॐ शंकरप्रियाय नम :
🙏🏻 थोड़ी देर तक बैठकर जप करना | और जिसको धन धान्य है, वो माँ से कहना मेरी गुरुचरणों में श्रध्दा बढे, भक्ति बढे (ये भी एक संपत्ति है साधक की) मेरी निष्ठा बढे मेरी उपासना बढे |
🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
🙏🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🙏

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