Dharma & Karma 

आज गुरुवार 12 सितंबर को दस दिवसीय गणेशोत्सव के अंतिम दिन क्या बोल रहा है आपका राशिफल..

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी धानिवबांग नालासोपारा पालघर महाराष्ट्र 🌹🌹🙏
सम्पर्क सूत्र -9518782511
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🙏🌹🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌹🙏
ll जय श्री राधे ll
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Presents

दिनाँक -: 12/09/2019,गुरुवार
चतुर्दशी, शुक्ल पक्ष
भाद्रपद
”””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि————–चतुर्दशी अहोरात्र तक
पक्ष—————————–शुक्ल
नक्षत्र————धनिष्ठा16:57:44
योग————–सुकर्मा19:32:11
करण————–गरज18:20:30
वार—————————गुरूवार
माह————————–भाद्रपद
चन्द्र राशि———————-कुम्भ
सूर्य राशि————————सिंह
रितु——————————-वर्षा
आयन——————-दक्षिणायण
संवत्सर———————-विकारी
संवत्सर (उत्तर)———–परिधावी
विक्रम संवत—————–2076
विक्रम संवत (कर्तक)——2075
शाका संवत——————1941

मुम्बई
सूर्योदय—————–06:26:30
सूर्यास्त——————18:42:56
दिन काल—————12:22:48
रात्री काल————–11:37:38
चंद्रोदय——————17:52:20
चंद्रास्त——————29:34:53

लग्न—-सिंह24°52′ , 144°51′

सूर्य नक्षत्र————-पूर्वाफाल्गुनी
चन्द्र नक्षत्र——————–धनिष्ठा
नक्षत्र पाया———————ताम्र

     पद, चरण  

गु—-धनिष्ठा 10:12:40

गे—-धनिष्ठा 16:57:44

गो—-शतभिषा 23:42:54

       ग्रह गोचर  

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

सूर्य=सिंह 24°42 ‘ पू o फा o, 4 टी
चन्द्र =कुम्भ01°23 ‘ धनिष्ठा’ 3 गु
बुध=सिंह 01°16 ‘उo फ़ा o’ 2 टो
शुक्र= कन्या 02 ° 40, उ oफा o’ 2 टो
मंगल=सिंह 19°12 ‘ पू oफ़ा o ‘ 2 टा
गुरु=वृश्चिक 20°48 ‘ ज्येष्ठा , 2 या
शनि=धनु 22°13′ पू oषा o ‘ 3 फा
राहू=मिथुन 20°05 ‘ पुनर्वसु , 1 के
केतु=धनु 20 ° 05′ पूo षाo, 3 फा

    शुभा$शुभ मुहूर्त

राहू काल 13:48 – 15:21अशुभ
यम घंटा 06:04 – 07:37अशुभ
गुली काल 09:10 – 10:43अशुभ
अभिजित 11:51 -12:40शुभ
दूर मुहूर्त 10:12 – 11:01अशुभ
दूर मुहूर्त 15:09 – 15:58अशुभ

  पंचक अहोरात्रअशुभ

     चोघडिया, दिन

शुभ 06:04 – 07:37शुभ
रोग 07:37 – 09:10अशुभ
उद्वेग 09:10 – 10:43अशुभ
चर 10:43 – 12:15शुभ
लाभ 12:15 – 13:48शुभ
अमृत 13:48 – 15:21शुभ
काल 15:21 – 16:54अशुभ
शुभ 16:54 – 18:27शुभ

  चोघडिया, रात

अमृत 18:27 – 19:54शुभ
चर 19:54 – 21:21शुभ
रोग 21:21 – 22:48अशुभ
काल 22:48 – 24:16अशुभ लाभ 24:16 – 25:43शुभ उद्वेग 25:43 – 27:10अशुभ शुभ 27:10 – 28:37शुभ अमृत 28:37 – 30:04*शुभ

  होरा, दिन

बृहस्पति 06:04 – 07:06
मंगल 07:06 – 08:08
सूर्य 08:08 – 09:10
शुक्र 09:10 – 10:12
बुध 10:12 – 11:13
चन्द्र 11:13 – 12:15
शनि 12:15 – 13:17
बृहस्पति 13:17 – 14:19
मंगल 14:19 – 15:21
सूर्य 15:21 – 16:23
शुक्र 16:23 – 17:25
बुध 17:25 – 18:27

होरा, रात

चन्द्र 18:27 – 19:25
शनि 19:25 – 20:23
बृहस्पति 20:23 – 21:21
मंगल 21:21 – 22:19
सूर्य 22:19 – 23:17
शुक्र 23:17 – 24:16
बुध 24:16* – 25:14
चन्द्र 25:14* – 26:12
शनि 26:12* – 27:10
बृहस्पति 27:10* – 28:08
मंगल 28:08* – 29:06
सूर्य 29:06* – 30:04

नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

  • दिशा शूल ज्ञान————-दक्षिण*
    परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा वेसन के लड्ड़ू खाके यात्रा कर सकते है l
    इस मंत्र का उच्चारण करें-:
    शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
    भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
  • अग्नि वास ज्ञान -:*
    यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
    चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
    दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
    नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
    नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।। 14 + 5 + 1 = 20 ÷ 4 = 0 शेष
    पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l
  • शिव वास एवं फल -:* 14 + 14 + 5 = 33 ÷ 7 = 5 शेष

ज्ञानवेलायां = कष्ट कारक

  • भद्रा वास एवं फल -:*

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

      विशेष जानकारी    
  • अनन्त चतुर्दशी व्रत
  • गणपति विसर्जन शुभ विचार

यस्यार्थास्तस्य मित्राणि यस्यर्थास्तस्य बांधवाः ।
यस्याथाः स पुमांल्लोके यस्यार्थाः सच पण्डितः ।।
।।चा o नी o।।

धनवान व्यक्ति के कई मित्र होते है. उसके कई सम्बन्धी भी होते है. धनवान को ही आदमी कहा जाता है और पैसेवालों को ही पंडित कह कर नवाजा जाता है.

       सुभाषितानि  

गीता -: क्षेत्रज्ञविभागयोग अo-13

क्षेत्रज्ञं चापि मां विद्धि सर्वक्षेत्रेषु भारत।,
क्षेत्रक्षेत्रज्ञयोर्ज्ञानं यत्तज्ज्ञानं मतं मम॥,

हे अर्जुन! तू सब क्षेत्रों में क्षेत्रज्ञ अर्थात जीवात्मा भी मुझे ही जान (गीता अध्याय 15 श्लोक 7 और उसकी टिप्पणी देखनी चाहिए) और क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ को अर्थात विकार सहित प्रकृति और पुरुष का जो तत्व से जानना है (गीता अध्याय 13 श्लोक 23 और उसकी टिप्पणी देखनी चाहिए) वह ज्ञान है- ऐसा मेरा मत है॥,2॥,

🌹 *व्रत पर्व विवरण 🌹

    *अनंत चतुर्दशी* 🌷

🙏🏻 गुरुवार, 12 सितंबर को दस दिवसीय गणेशोत्सव का अंतिम दिन है। इस दिन की गई गणेश पूजा से घर में सुख-समृद्धि यानी रिद्धि और सिद्धि का प्रवेश होता है। गणेशजी की कृपा से सभी दुख दूर हो जाते हैं। यहां 23 सितंबर के लिए खास उपाय…
🌷 ऐसे करें गणेश पूजा 🌷
सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद गणेशजी की पूजा करें। पूजा में श्रीगणेश को सिंदूर, चंदन, जनेऊ, दूर्वा, लड्डू या गुड़ से बनी मिठाई का भोग लगाएं। धूप व दीप लगाकर आरती करें। पूजन में इस मंत्र का जप करें-
🌷 मंत्र- प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम्।
तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयो: शिवाय।।
प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोकदावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम्।
अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहमुत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य।।
🙏🏻 इस मंत्र का अर्थ यह है कि मैं ऐसे देवता का पूजन करता हूं, जिनकी पूजा स्वयं ब्रह्मदेव करते हैं। ऐसे देवता, जो मनोरथ सिद्धि करने वाले हैं, भय दूर करने वाले हैं, शोक का नाश करने वाले हैं, गुणों के नायक हैं, गजमुख हैं, अज्ञान का नाश करने वाले हैं। मैं शिव पुत्र श्री गणेश का सुख-सफलता की कामना से भजन, पूजन और स्मरण करता हूं।


🌷 लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप करें 🌷
दन्ताभये चक्र दरो दधानं, कराग्रस्वर्णघटं त्रिनेत्रम्।
धृताब्जया लिंगितमब्धिपुत्रया लक्ष्मी गणेशं कनकाभमीडे।।
श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरदे सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।।
🙏🏻 यदि आप लक्ष्मी कृपा चाहते हैं तो पूजा में इस लक्ष्मी-विनायक मंत्र का जप कम से कम 108 बार करें। मंत्र जप के लिए कमल के गट्‌टे की माला का उपयोग करना चाहिए।
💥 ध्यान रखें मंत्र का जप सही उच्चारण के साथ करना चाहिए।
यदि आप इस मंत्र का जप नहीं कर पा रहे हैं तो इन सरल मंत्रों का जप कर सकते हैं।
🌷 श्रीगणेश मंत्र- ॐ महोदराय नम:। ॐ विनायकाय नम:।
🌷 महालक्ष्मी मंत्र- ॐ महालक्ष्म्यै नम:। ॐ दिव्याये नम:
अनंत चतुर्दशी 🌷
12 सितम्बर 2019 गुरुवार को अंनत चतुर्दशी है ।
🙏🏻 भाद्रपद मास के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को अनन्त चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन अनन्त भगवान की पूजा करके संकटों से रक्षा करने वाला अनन्तसूत्र बांधा जाता है।
🙏🏻 कहा जाता है कि जब पाण्डव जुएं में अपना सारा राज-पाट हारकर वन में कष्ट भोग रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनन्तचतुर्दशी का व्रत करने की सलाह दी थी। धर्मराज युधिष्ठिर ने अपने भाइयों तथा द्रौपदी के साथ पूरे विधि-विधान से यह व्रत किया तथा अनन्तसूत्रधारण किया। अनन्तचतुर्दशी-व्रत के प्रभाव से पाण्डव सब संकटों से मुक्त हो गए।व्रत-विधान-व्रतकर्ता प्रात:स्नान करके व्रत का संकल्प करें। शास्त्रों में यद्यपि व्रत का संकल्प एवं पूजन किसी पवित्र नदी या सरोवर के तट पर करने का विधान है, तथापि ऐसा संभव न हो सकने की स्थिति में घर में पूजागृह की स्वच्छ भूमि पर कलश स्थापित करें। कलश पर शेषनाग की शैय्यापर लेटे भगवान विष्णु की मूर्ति अथवा चित्र को रखें। उनके समक्ष चौदह ग्रंथियों (गांठों) से युक्त अनन्तसूत्र (डोरा) रखें। इसके बाद “ॐ अनन्तायनम:” मंत्र से भगवान विष्णु तथा अनंतसूत्र की षोडशोपचार-विधिसे पूजा करें। पूजनोपरांत अनन्तसूत्र को मंत्र पढकर पुरुष अपने दाहिने हाथ और स्त्री बाएं हाथ में बांध लें-


🌷 अनंन्तसागर महासमुद्रे मग्नान्समभ्युद्धर वासुदेव।
अनंतरूपे विनियोजितात्माह्यनन्तरूपाय नमो नमस्ते॥
🙏🏻 अनंतसूत्र बांध लेने के पश्चात किसी ब्राह्मण को नैवेद्य (भोग) में निवेदित पकवान देकर स्वयं सपरिवार प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के बाद व्रत-कथा को पढें या सुनें। कथा का सार-संक्षेप यह है- सत्ययुग में सुमन्तु नाम के एक मुनि थे। उनकी पुत्री शीला अपने नाम के अनुरूप अत्यंत सुशील थी। सुमन्तु मुनि ने उस कन्या का विवाह कौण्डिन्यमुनि से किया। कौण्डिन्यमुनि अपनी पत्नी शीला को लेकर जब ससुराल से घर वापस लौट रहे थे, तब रास्ते में नदी के किनारे कुछ स्त्रियां अनन्त भगवान की पूजा करते दिखाई पडीं। शीला ने अनन्त-व्रत का माहात्म्य जानकर उन स्त्रियों के साथ अनंत भगवान का पूजन करके अनन्तसूत्र बांध लिया। इसके फलस्वरूप थोडे ही दिनों में उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया।
🌷 कथा
🙏🏻 एक दिन कौण्डिन्य मुनि की दृष्टि अपनी पत्नी के बाएं हाथ में बंधे अनन्तसूत्र पर पडी, जिसे देखकर वह भ्रमित हो गए और उन्होंने पूछा-क्या तुमने मुझे वश में करने के लिए यह सूत्र बांधा है? शीला ने विनम्रतापूर्वक उत्तर दिया-जी नहीं, यह अनंत भगवान का पवित्र सूत्र है। परंतु ऐश्वर्य के मद में अंधे हो चुके कौण्डिन्यने अपनी पत्नी की सही बात को भी गलत समझा और अनन्तसूत्रको जादू-मंतर वाला वशीकरण करने का डोरा समझकर तोड दिया तथा उसे आग में डालकर जला दिया। इस जघन्य कर्म का परिणाम भी शीघ्र ही सामने आ गया। उनकी सारी संपत्ति नष्ट हो गई। दीन-हीन स्थिति में जीवन-यापन करने में विवश हो जाने पर कौण्डिन्यऋषि ने अपने अपराध का प्रायश्चित करने का निर्णय लिया। वे अनन्त भगवान से क्षमा मांगने हेतु वन में चले गए। उन्हें रास्ते में जो मिलता वे उससे अनन्तदेवका पता पूछते जाते थे। बहुत खोजने पर भी कौण्डिन्यमुनि को जब अनन्त भगवान का साक्षात्कार नहीं हुआ, तब वे निराश होकर प्राण त्यागने को उद्यत हुए। तभी एक वृद्ध ब्राह्मण ने आकर उन्हें आत्महत्या करने से रोक दिया और एक गुफामें ले जाकर चतुर्भुज अनन्तदेव का दर्शन कराया।


🙏🏻 भगवान ने मुनि से कहा-तुमने जो अनन्तसूत्र का तिरस्कार किया है, यह सब उसी का फल है। इसके प्रायश्चित हेतु तुम चौदह वर्ष तक निरंतर अनन्त-व्रत का पालन करो। इस व्रत का अनुष्ठान पूरा हो जाने पर तुम्हारी नष्ट हुई सम्पत्ति तुम्हें पुन:प्राप्त हो जाएगी और तुम पूर्ववत् सुखी-समृद्ध हो जाओगे। कौण्डिन्यमुनि ने इस आज्ञा को सहर्ष स्वीकार कर लिया। भगवान ने आगे कहा-जीव अपने पूर्ववत् दुष्कर्मो का फल ही दुर्गति के रूप में भोगता है।मनुष्य जन्म-जन्मांतर के पातकों के कारण अनेक कष्ट पाता है। अनन्त-व्रत के सविधि पालन से पाप नष्ट होते हैं तथा सुख-शांति प्राप्त होती है। कौण्डिन्यमुनि ने चौदह वर्ष तक अनन्त-व्रत का नियमपूर्वक पालन करके खोई हुई समृद्धि को पुन:प्राप्त कर लिया।

     दैनिक राशिफल  

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
अप्रत्याशित लाभ के योग हैं। जुए-सट्टे से दूर रहें। नौकरी में प्रमोशन मिल सकता है। कारोबार में वृद्धि होगी। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। किसी बड़ी समस्या का हल होगा। भाग्य का साथ रहेगा विवाद से बचें। भय रहेगा। राजमान मिल सकता है। प्रमाद न करें।

🐂वृष
चिंता तथा तनाव में वृद्धि होगी। लाभ के अवसर टलेंगे। कोई अप्रत्याशित खर्च सामने आएगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी। विवेक का प्रयोग करें।

👫मिथुन
बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा मनोनुकूल रहेगी। नए काम मिलेंगे। समय की अनुकूलता का लाभ लें। आय में वृद्धि होगी। कारोबार अच्छा चलेगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। प्रतिद्वंद्विता बढ़ सकती है। स्वाभिमान को ठेस पहुंच सकती है।

🦀कर्क
शारीरिक कष्ट से बाधा संभव है। लापरवाही न करें। सुख के साधनों पर व्यय होगा। प्रसन्नता बनी रहेगी। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। घर-बाहर सभी ओर से सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। जल्दबाजी न करें।

🐅सिंह
जीवनसाथी की तरफ से चिंता का वातावरण बनेगा। शारीरिक कष्ट की आशंका है। यात्रा सफल रहेगी। पूजा-पाठ में मन लगेगा। सत्संग का लाभ मिलेगा। कोर्ट-कचहरी व सरकारी कार्यालयों में रुके कार्यों में गति आएगी। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। जोखिम बिलकुल न लें।

🙍कन्या
कुसंगति से हानि होगी। वाहन व मशीनरी के प्रयोग में सावधानी रखें। किसी व्यक्ति से बड़े विवाद की आशंका है। वाणी पर नियंत्रण रखें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। महत्वपूर्ण निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें।

⚖तुला
लेन-देन में जल्दबाजी से बचें। चोट व रोग से हानि की आशंका है। कानूनी अड़चन दूर होकर स्थिति अनुकूल बनेगी। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। स्त्री पक्ष से लाभदायक सूचना मिल सकती है। प्रसन्नता रहेगी।

🦂वृश्चिक
किसी अनहोनी की आशंका रहेगी। शत्रु नतमस्तक रहेंगे। भूमि व भवन संबंधी लाभदायक योजना बनेगी। कारोबार से बड़ा मुनाफा हो सकता है। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। नौकरी में जवाबदारी बढ़ सकती है। पार्टनरों का सहयोग मिलेगा।

🏹धनु
पार्टी व पिकनिक का आनंद मिल सकता है। विद्यार्थी वर्ग अपने कार्य लगन से कर पाएगा। अध्ययन में मन लगेगा। संगीत व चित्रकारी आदि रचनात्मक कार्यों में रुचि रहेगी। आय में वृद्धि होगी। पारिवारिक सहयोग मिलेगा। प्रसन्नता रहेगी।

🐊मकर
लेन-देन में जल्दबाजी न करें। किसी से अकारण विवाद हो सकता है। हृदय को ठेस पहुंच सकती है। दु:खद समाचार मिलने की आशंका है। पुराना रोग उभर सकता है। भागदौड़ रहेगी। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। आय में निश्चितता रहेगी।

🍯कुंभ
व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। मेहनत का फल प्राप्त होगा। धन प्राप्ति सुगम होगी। मित्रों तथा रिश्तेदारों की सहायता करने का अवसर प्राप्त होगा। घर-बाहर पूछ-परख रहेगी। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न रहेंगे।

🐟मीन
राजभय रहेगा। जल्दबाजी तथा विवाद करने से बचें। दूर से शुभ समाचार प्राप्त होंगे। घर में मेहमानों का आवागमन रहेगा। किसी मांगलिक कार्य का आयोजन हो सकता है। नौकरी में अधिकार बढ़ सकते हैं। प्रसन्नता रहेगी।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

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