Dharma & Karma (ज्योतिष शास्त्र) Dream Zone 

कर्क राशि वालों को उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त हो सकती है। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात संभव, और विरोधी भी सक्रिय रहेंगे। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। नही तो बड़ा काम…

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी धानिवबांग नालासोपारा पालघर महाराष्ट्र सम्पर्क सूत्र-: 9518782511
🙏🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🙏
🙏🌸🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌸🙏
🙏llजय श्री राधे ll🙏
🙏🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🙏

दिनाँक-: 20/07/2021,मंगलवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
आषाढ
“”””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———- एकादशी 19:17:00 तक
पक्ष————————– शुक्ल
नक्षत्र————अनुराधा 20:31:41
योग————— शुक्ल 19:33:13
करण———— वणिज 08:39:36
करण———– विष्टि भद्र 19:17:00
वार———————– मंगलवार
माह————————–आषाढ
चन्द्र राशि—————— वृश्चिक
सूर्य राशि——————– कर्क
रितु—————————-वर्षा
आयन—————— दक्षिणायण
संवत्सर———————- प्लव
संवत्सर (उत्तर) ——–आनंद
विक्रम संवत—————- 2078
शाका संवत—————– 1943

मुम्बई
सूर्योदय—————- 05:37:22
सूर्यास्त—————– 19:13:34
दिन काल————— 13:36:12
रात्री काल————– 10:24:18
चंद्रोदय—————— 15:37:19
चंद्रास्त—————– 26:24:44

लग्न—- कर्क 3°22′ , 93°22′

सूर्य नक्षत्र——————– पुष्य
चन्द्र नक्षत्र—————- अनुराधा
नक्षत्र पाया——————– रजत

         *🙏🌸 पद, चरण 🌸🙏*

नी———— अनुराधा 09:30:16

नू———— अनुराधा 15:01:17

ने———— अनुराधा 20:31:41

नो————– ज्येष्ठा 26:01:33

🌸 राहू काल 15:50 – 17:32 अशुभ
🌸 अभिजित 11:58 -12:53 शुभ

 *🌸 चोघडिया, दिन*

रोग 05:37 – 07:19 अशुभ
उद्वेग 07:19 – 09:01 अशुभ
चर 09:01 – 10:43 शुभ
लाभ 10:43 – 12:25 शुभ
अमृत 12:25 – 14:07 शुभ
काल 14:07 – 15:50 अशुभ
शुभ 15:50 – 17:32 शुभ
रोग 17:32 – 19:14 अशुभ

*🌸 चोघडिया, रात*

काल 19:14 – 20:32 अशुभ
लाभ 20:32 – 21:50 शुभ
उद्वेग 21:50 – 23:08 अशुभ
शुभ 23:08 – 24:26* शुभ
अमृत 24:26* – 25:44* शुभ
चर 25:44* – 27:02* शुभ
रोग 27:02* – 28:20* अशुभ
काल 28:20* – 29:38* अशुभ

🌸 दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड़ खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

  *🌸अग्नि वास ज्ञान  -:*

11 + 3 + 1 = 15 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

       *🌸 शिव वास एवं फल -:*

11 + 11 + 5 = 27 ÷ 7 = 6 शेष
क्रीड़ायां = शोक ,दुःख कारक

🌸 भद्रा वास एवं फल -:

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

प्रातः 08:38 से रात्रि 19:17 तक

स्वर्ग लोक = शुभ कारक

          *🌸 विशेष जानकारी 🌸*
  • देवशयनी एकादशी व्रत (सर्वेषां)

*चतुर्मास नियम प्रारम्भ ,द्वारिकाधीश जी मथुरा

       *🌸 शुभ विचार 🌸*

काष्ठ-पाषाण-धातूनां कृत्वा भावेन सेवनम् ।
श्रध्दया च तया सिध्दिस्तस्य विष्णोः प्रसादतः ।।
।।चा o नीo।।

काठ, पाषाण तथा धातु की भी श्रध्दापूर्वक सेवा करने से और भगवत्कृपा से सिध्दि प्राप्त हो जाती है।

    *🌸 सुभाषितानि 🌸*

गीता -: आत्मसयंमयोग अo-06

योऽयं योगस्त्वया प्रोक्तः साम्येन मधुसूदन ।,
एतस्याहं न पश्यामि चञ्चलत्वात्स्थितिं स्थिराम्‌ ॥,

अर्जुन बोले- हे मधुसूदन! जो यह योग आपने समभाव से कहा है, मन के चंचल होने से मैं इसकी नित्य स्थिति को नहीं देखता हूँ॥,33॥,

           🌸 *व्रत पर्व विवरण -🌸*

देवशयनी एकादशी, चातुर्मास व्रतारम्भ, पंढरपुर यात्रा
🌸 विशेष – हर एकादशी को श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख शांति बनी रहती है l राम रामेति रामेति । रमे रामे मनोरमे ।। सहस्त्र नाम त तुल्यं । राम नाम वरानने ।।
🌸 आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l
🌸 एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।
🌸 एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।
🌸 जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते है।

🌸 चतुर्मास एवं पुरुष सूक्त 🌸
आषाढ़ शुक्ल एकादशी (20 जुलाई, मंगलवार) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (15 नवम्बर, सोमवार) तक चातुर्मास है ।
🙏🏻 चतुर्मास में भगवान श्रीविष्णु के योगनिद्रा में शयन करने पर जिस किसी नियम का पालन किया जाता है, वह अनंत फल देनेवाला होता है – ऐसा ब्रह्माजी का कथन है |
🙏🏻 जो मानव भगवान वासुदेव के उद्देश्य से केवल शाकाहार करके चतुर्मास व्यतीत करता है वह धनी होता है | जो प्रतिदिन नक्षत्रों का दर्शन करके केवल एक बार ही भोजन करता हैं वह धनवान, रूपवान और माननीय होता है | जो मानव ब्रह्मचर्य – पालनपूर्वक चौमासा व्यतीत करता हैं वह श्रेष्ठ विमान पर बैठकर स्वेच्छा से स्वर्गलोक जाता है |जो चौमासेभर नमक को छोड़ देता है उसके सभी पुर्तकर्म ( परोपकार एवं धर्मसम्बन्धी कार्य ) सफल होते है | जिसने कुछ उपयोगी वस्तुओं को चौमासेभर त्यागने का नियम लिया हो, उसे वे वस्तुएँ ब्राह्मण को दान करनी चाहिए | ऐसा करने से वह त्याग सफल होता है | जो मनुष्य नियम, व्रत अथवा जप के बिना चौमासा बिताता है वह मुर्ख है |
🙏🏻 जो चतुर्मास में भगवान विष्णु के आगे खड़ा होकर ‘पुरुष सूक्त’ का जप करता है, उसकी बुद्धि बढती है | -(स्कंदपुराण, नागर खंड, उत्तरार्ध )
🙏🏻 बुद्धि बढाने के इच्छुक पाठक और ‘बाल संस्कार केंद्र’ के बच्चे ‘पुरुष सूक्त’ से फायदा उठायें | आनेवाले दिनों में ‘बाल संस्कार केंद्र’ के बुद्धिमान बच्चे ही देश के कर्णधार होंगे |
🌸 पुरुष सूक्त 🌸
🙏🏻 (ऋग्वेद : १०-९०, यजुर्वेद : अध्याय – ३१ )
🌸 ॐ सहस्रशीर्षा पुरुष: सहस्त्राक्ष: सहस्त्रपात् |
स भूमिं विश्वतो वृत्वात्यतिष्ठद्दशांगुलम् || १||
🙏🏻 ‘आदिपुरुष असंख्य सिर, असंख्य नेत्र और असंख्य पाद से युक्त था | वह पृथ्वी को सब ओर से घेरकर भी दस अंगुल अधिक ही था |’
🌸 पुरुष एवेदं सर्वं यदभूतं यच्च भाव्यम् |
उतामृतत्वस्येशानो यदन्नेनातिरोहति || २ ||
🙏🏻 ‘यह जो वर्तमान जगत है, वह सब पुरुष ही है | जो पहले था और आगे होगा, वह भी पुरुष ही है, क्योंकि वह अमृतत्व का, देवत्व का स्वामी है | वह प्राणियों के कर्मानुसार भोग देने के लिए अपनी कारणावस्था का अतिक्रम करके दृश्यमान जगतअवस्था को स्वीकार करता है, इसलिए यह जगत उसका वास्तविक स्वरूप नहीं है |’
🌸 एतावानस्य महिमातो ज्यायाँश्च पुरुष : |
पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपाद्स्यामृतं दिवि || ३ ||
🙏🏻 ‘अतीत, अनागत एवं वर्तमान रूप जितना जगत है उतना सब इस पुरुष की महिमा अर्थात एक प्रकार का विशेष सामर्थ्य है, वैभव है, वास्तवस्वरूप नहीं | वास्तव पुरुष तो इस महिमा से भी बहुत बड़ा है | सम्पूर्ण त्रिकालवर्ती भूत इसके चतुर्थ पाद में हैं | इसके अवशिष्ट सच्चिदानन्दस्वरुप तीन पाद अमृतस्वरूप हैं और अपने स्वयंप्रकाश द्योतनात्मक रूप में निवास करते हैं |’
🌸 त्रिपादूर्ध्व उदैत्पुरुष: पादोऽस्येहाभवत् पुन: |
ततो विष्वं व्यक्रामत्साशनानशने अभि ||४ ||
‘त्रिपाद पुरुष संसाररहित ब्रह्मस्वरूप है | वह अज्ञानकार्य संसार से विलक्षण और इसके गुण-दोषों से अस्पृष्ट है | इसका जो किंचित मात्र अंश माया में हैं वही पुन: -पुन: सृष्टि – संहार के रूप में आता – जाता रहता है | यह मायिक अंश ही देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी आदि विविध रूपों में व्याप्त है | वही सभोजन प्राणी है और निर्भोजन जड़ है | सारी विविधता इस चतुर्थाश की ही है |’
🌸 तस्माद्विराळजायत विराजो अधि पुरुष: |
स जातो अत्यरिच्यत पश्चादभूमिमथो पुर: ||५ ||
🙏🏻 ‘उस आदिपुरुष से विराट ब्रह्माण्ड देह की उत्पत्ति हुई | विराट देह को ही अधिकरण बनाकर उसका अभिमानी एक और पुरुष प्रकट हुआ | वह पुरुष प्रकट होकर विराट से पृथक देवता, मनुष्य, पशु, पक्षी आदि के रूप में हो गया | उसके बाद पृथ्वी की सृष्टि हुई और जीवों के निवास योग्य सप्त धातुओं के शरीर बने |’
🌸 ॐ यत्पुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतन्वत |
वसन्तो अस्यासीदाज्यं ग्रीष्म इध्म: शरद्धवि: ||६ ||
🙏🏻 ‘देवताओं ने उसी उत्पन्न द्वितीय पुरुष को हविष्य मानकर उसी के द्वारा मानस यज्ञ का अनुष्ठान किया | इस यज्ञ में वसंत ऋतू आज्य (घृत) के रूप में, ग्रीष्म ऋतू ईंधन के रूप में और शरद ऋतू हविष्य के रूप में संकल्पित की गयी |’
तं यज्ञं बर्हिषि प्रौक्षण पुरुषं जातमग्रत: |
तेन देवा अजयन्त साध्या ऋषयश्च ये || ७ ||
🙏🏻 ‘वही द्वितीय पुरुष यज्ञ का साधन हुआ | मानस यज्ञ में उसीको पशु-भावना से युप (यज्ञ का खंभा) में बाँधकर प्रोक्षण किया गया, क्योंकि सारी सृष्टि के पूर्व वही पुरुषरूप से उत्पन्न हुआ था | इसी पुरुष के द्वारा देवताओं ने मानस याग किया | वे देवता कौन थे ? वे थे सृष्टि – साधन योग्य प्रजापति आदि साध्य देवता एवं तदनुकूल मंत्रद्रष्टा ऋषि | अभिप्राय यह है कि उसी पुरुष से सभीने यज्ञ किया |’
🌸 तस्माद्यज्ञात सर्वंहुत: संभृतं पृषदाज्यम् |
पशून ताँश्चक्रे वायव्यानारण्यान् ग्राम्याश्च ये || ८ ||
🙏🏻 ‘इस यज्ञ में सर्वात्मक पुरुष का हवन किया जाता है | इसी मानस यज्ञ से दधिमिश्रित आज्य-सम्पादन किया गया अर्थात सभी भोग्य पदार्थों का निर्माण हुआ | इसी यज्ञ से वायुदेवताक आरण्य (जंगली) पशुओं का निर्माण हुआ | जो ग्राम्य पशु हैं, उनका भी |’
🌸 तस्माद्यज्ञात सर्वहुत ऋच: सामानि जज्ञिरे |
छन्दांसि जज्ञिरे तस्माद्यजुस्तस्मादजायत || ९ ||
🙏🏻 ‘पूर्वोक्त सर्वहवनात्मक यज्ञ से ऋचाएँ और साम उत्पन्न हुए | उस यज्ञ से ही गायत्री आदि छन्दों का जन्म हुआ | उसी यज्ञ से यजुष (यजुर्वेद) की भी उत्पत्ति हुई |’
🙏🏻 तस्मादश्वा अजायन्त ये के चोभयादत: |
गावो ह जज्ञिरे तस्मात तस्माज्जाता अजावय: ||१० ||
🙏🏻 ‘उस पूर्वोक्त यज्ञ से यज्ञोपयोगी अश्वों का जन्म हुआ | जीके दोनों ओर दाँत होते हैं, उनका भी जन्म हुआ | उसीसे गायों का भी जन्म हुआ और उसीसे बकरी – भेड़ें भी पैदा हुई |’
🌸 ॐ यत्पुरुषं व्यदधु: कतिधा व्यकल्पयन् |
मुखं किमस्य कौ बाहू का ऊरू पादा उच्येते ||११ ||
🙏🏻 ‘जब द्वितीय पुरुष ब्रह्मा की ही यज्ञ – पशु के रूप में कल्पना की गयी, तब उसमें किस – किस रूप से, किस – किस स्थान से, किस – किस प्रकार विशेष से उसके अंग- उपांगों की भावना की गयी ? उसका मुख क्या बना ? उसके बाहू क्या बने ? तथा उसके ऊरू (जंघा) और पाद क्या कहे गये ?’
🌸 ब्राह्मणोंऽस्य मुखमासीद् बाहू राजन्य: कृत: |
ऊरू तदस्य यद्वैश्य: पदभ्यां शूद्रों अजायत || १२ ||
🙏🏻 ‘इस पुरुष का मुख ही ब्राह्मण के रूप में कल्पित हैं | बाहू राजन्य माना गया हैं | ऊरू वैश्य है और चरण शुद्र हैं |’
चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षो: सूर्यो अजायत |
मुखादिन्द्रश्चाग्निश्च प्राणादवायुरजायत || १३ ||
🙏🏻 ‘मन से चन्द्रमा, चक्षु से सूर्य, मुख से इंद्र तथा अग्नि और प्राण से वायु की कल्पना की गयी |’
🌸 नाभ्या आसीदन्तरिक्षं शीष्णॉ द्यौ: समवर्तत |
पदभ्यां भूमिर्दिश: श्रोत्रात्तथा लोकों अकल्पयन || १४ ||
🙏🏻 ‘नाभि से अंतरिक्ष लोक, सिर से द्युलोक, चरणों से भूमि और श्रोत्र से दिशाएँ – इस प्रकार लोकों की कल्पना की गयी |’
🌸 सप्तास्यासन् परिधयस्त्रि: सप्त समिध: कृता: |
देवा यद्यज्ञं तन्वाना अबध्नन् पुरुषं पशुम् || १५ ||
🙏🏻 ‘जब देवताओं ने अपने मानस यज्ञ का विस्तार करते हुए वैराज पुरुष (परमात्मा) को पशु के रूप में कल्पित किया, तब इस यज्ञ की सात परिधियाँ हुई और इक्कीस समिधाएँ |’
🌸 यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवास्तानि धर्माणि प्रथमान्यासन् |
ते ह नाकं महिमान: सचन्त यत्र पूर्व साध्या: सन्ति देवा: ||१६||
🙏🏻 ‘प्रजापति के प्राणरूप विद्वान देवताओं ने अपने मानस संकल्परूप यज्ञ के द्वारा यज्ञस्वरूप पुरुषोत्तम का यजन (आराधन, याग) किया | वही धर्म है सर्वश्रेष्ठ एवं सनातन, क्योंकि सम्पूर्ण विकारों को धारण करता हैं | वे धर्मात्मा भगवान के माहात्म्य, वैभव आदि से सम्पन्न होकर परमानंद-लोक में समा गये | वहीँ प्राचीन उपासक देवता विराजमान रहते हैं

🙏🏻पंचक आरम्भ
जुलाई 25, 2021, रविवार को 10:48 pm
पंचक अंत
जुलाई 30, 2021, शुक्रवार को 02:03 pm

🌸 एकादशी
20 जुलाई- देवशयनी, हरिशयनी एकादशी

🌸 प्रदोष
21 जुलाई: प्रदोष व्रत

*🌸 पूर्णिमा*

आषाढ़ पूर्णिमा व्रत जुलाई 23, शुक्रवार
श्रावण पूर्णिमा 22 अगस्त, रविवार

         *🌸 दैनिक राशिफल 🌸*

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
यात्रा लाभदायक रहेगी। डूबी हुई रकम प्राप्त हो सकती है, प्रयास करें। उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। शेयर मार्केट से बड़ा लाभ हो सकता है। संचित कोष में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। कारोबारी सौदे बड़े हो सकते हैं। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य प्रभावित होगा, सावधानी रखें।

🐂वृष
फालतू खर्च पर नियंत्रण रखें। बजट बिगड़ेगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। शारीरिक कष्ट से बाधा उत्पन्न होगी। लेन-देन में सावधानी रखें। अपरिचित व्यक्तियों पर अंधविश्वास न करें। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। आय होगी। संतुष्टि नहीं होगी।

👫मिथुन
नवीन वस्त्राभूषण की प्राप्ति संभव है। यात्रा लाभदायक रहेगी। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। कारोबारी बड़े सौदे बड़ा लाभ दे सकते हैं। निवेश में सोच-समझकर हाथ डालें। आशंका-कुशंका रहेगी। पुराना रोग उभर सकता है। लापरवाही न करें। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

🦀कर्क
उत्साहवर्धक सूचना प्राप्त होगी। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। विरोधी सक्रिय रहेंगे। जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें। बड़ा काम करने का मन बनेगा। झंझटों से दूर रहें। कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ सकता है। फालतू खर्च होगा। व्यापार मनोनुकूल लाभ देगा। जोखिम बिलकुल न लें।

🐅सिंह
कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। चिंता बनी रहेगी। जीवनसाथी से सहयोग मिलेगा। मेहनत का फल मिलेगा। कार्यसिद्धि होगी। निवेश लाभदायक रहेगा। व्यापार-व्यवसाय में मनोनुकूल लाभ होगा। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। निवेश शुभ रहेगा। व्यस्तता रहेगी।

🙍‍♀️कन्या
दूर से बुरी खबर मिल सकती है। दौड़धूप अधिक होगी। बेवजह तनाव रहेगा। किसी व्यक्ति से कहासुनी हो सकती है। फालतू बातों पर ध्यान न दें। मेहनत अधिक व लाभ कम होगा। किसी व्यक्ति के उकसाने में न आएं। शत्रुओं की पराजय होगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा। आय में निश्चितता रहेगी।

⚖️तुला
पार्टी व पिकनिक का आनंद मिलेगा। रचनात्मक कार्य सफल रहेंगे। मनपसंद भोजन का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय लाभप्रद रहेगा। समय की अनुकूलता का लाभ मिलेगा। व्यस्तता के चलते स्वास्थ्य कमजोर रह सकता है। दूसरों के झगड़ों में न पड़ें। अपने काम पर ध्यान दें। लाभ होगा।

🦂वृश्चिक
बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। परीक्षा व साक्षात्कार आदि में सफलता प्राप्त होगी। स्थायी संपत्ति से बड़ा लाभ हो सकता है। समय पर कर्ज चुका पाएंगे। नौकरी में अधिकारी प्रसन्न तथा संतुष्ट रहेंगे। निवेश शुभ फल देगा। घर-परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी, ध्यान रखें।

🏹धनु
कानूनी अड़चन दूर होकर लाभ की स्थिति निर्मित होगी। प्रेम-प्रसंग में जोखिम न लें। व्यापार में लाभ होगा। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। निवेश में सोच-समझकर हाथ डालें। शत्रु पस्त होंगे। विवाद में न पड़ें। अपेक्षाकृत कार्य समय पर होंगे। प्रसन्नता रहेगी। भाग्य का साथ मिलेगा। व्यस्तता रहेगी। प्रमाद न करें।

🐊मकर
घर-परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। वाणी पर नियंत्रण रखें। चोट व दुर्घटना से बड़ी हानि हो सकती है। लेन-देन में जल्दबाजी न करें। फालतू खर्च होगा। विवाद को बढ़ावा न दें। अपेक्षाकृत कार्यों में विलंब होगा। चिंता तथा तनाव रहेंगे। आय में निश्चितता रहेगी। शत्रुभय रहेगा।

🍯कुंभ
व्यवसाय में ध्यान देना पड़ेगा। व्यर्थ समय न गंवाएं। पूजा-पाठ में मन लगेगा। कानूनी अड़चन दूर होगी। जल्दबाजी से हानि संभव है। थकान रहेगी। कुसंगति से बचें। निवेश शुभ रहेगा। पारिवारिक सहयोग प्राप्त होगा। लाभ के अवसर हाथ आएंगे। दूसरों के काम में हस्तक्षेप न करें। घर-बाहर प्रसन्नता रहेगी।

🐟मीन
पुराना रोग उभर सकता है। योजना फलीभूत होगी। कार्यस्थल पर परिवर्तन संभव है। विरोधी सक्रिय रहेंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी। मित्रों की सहायता कर पाएंगे। आय में वृद्धि होगी। शेयर मार्केट से लाभ होगा। नौकरी में प्रभाव वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय लाभदायक रहेगा।
घर-परिवार में सुख-शांति रहेगी।

🌸 जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभाशीष और बधाई
दिनांक 20 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2 होगा। आप अत्यधिक भावुक होते हैं। आप स्वभाव से शंकालु भी होते हैं। दूसरों के दु:ख-दर्द से आप परेशान हो जाना आपकी कमजोरी है। ग्यारह की संख्या आपस में मिलकर दो होती है इस तरह आपका मूलांक दो होगा। इस मूलांक को चंद्र ग्रह संचालित करता है। चंद्र ग्रह मन का कारक होता है।
चंद्र के समान आपके स्वभाव में भी उतार-चढ़ाव पाया जाता है। आप अगर जल्दबाजी को त्याग दें तो आप जीवन में बहुत सफल होते हैं। आप मानसिक रूप से तो स्वस्थ हैं लेकिन शारीरिक रूप से आप कमजोर हैं। चंद्र ग्रह स्त्री ग्रह माना गया है। अत: आप अत्यंत कोमल स्वभाव के हैं। आपमें अभिमान तो जरा भी नहीं होता।

शुभ दिनांक : 2, 11, 20, 29

शुभ अंक : 2, 11, 20, 29, 56, 65, 92

शुभ वर्ष : 2027, 2029, 2036

ईष्टदेव : भगवान शिव, बटुक भैरव

शुभ रंग : सफेद, हल्का नीला, सिल्वर ग्रे

🌸 कैसा रहेगा यह वर्ष
लेखन से संबंधित मामलों में सावधानी रखना होगी। बगैर देखे किसी कागजात पर हस्ताक्षर ना करें। किसी नवीन कार्य योजनाओं की शुरुआत करने से पहले बड़ों की सलाह लें। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति ठीक-ठीक रहेगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से संभल कर चलने का वक्त होगा। पारिवारिक विवाद आपसी मेलजोल से ही सुलझाएं। दखलअंदाजी ठीक नहीं रहेगी।

              🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏
Spread the love

Written by 

Related Posts

Leave a Comment

3 × one =

WhatsApp chat