क्या ये सच है? गर्मी बढ़ने पर खत्म हो जाएगा कोरोना वायरस का खतरा? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट…

कोविड-19 (COVID-19) वायरस अब 110 देशों में फैल गया है जिसका अभी तक कोई टीका या इलाज नहीं है. डॉ. लक्ष्मण जेसानी, सलाहकार, संक्रामक रोग, अपोलो अस्पताल, नवी मुंबई का कहना है कि ऐसा अनुमान लगाया गया है कि बढ़ा हुआ तापमान वायरस को मार सकता है और गर्मी की शुरुआत में वायरस के प्रसार में भी कमी आ सकती है. हालांकि, वैज्ञानिकों के पास COVID-19 पर गर्मियों के तापमान के प्रभाव पर कोई निश्चित जवाब नहीं है. ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने इससे बचने के लिए सावधानियां बरतने की सलाह दी, तो कुछ ने गर्मी से कोरोना वायरस के प्रभाव (Coronavirus Outbreak) के बारे में कहा कि जिन देशों में गर्मी ज्यादा है वहां भी कोरोना वायरस का प्रकोप देखने को मिल रहा है. ऐसे में इस वायरस के बारे में ज्यादा कुछ अभी कहा नहीं जा सकता है।

यह देखा गया है कि कोरोनावायरस सूखी सतहों पर 8-10 दिनों के लिए सक्रिय रह सकता है. आमतौर पर सभी वायरस गर्मी बढ़ने पर निष्क्रिय या नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कोरोनावायरस 37 डिग्री सेल्सियस पर मानव शरीर में जीवित रहता है, तो अभी तक COVID-19 को निष्क्रिय करने के लिए सटीक तापमान का अंदाजा नहीं लगाया जा सका है।

दुनिया भर में विभिन्न विशेषज्ञों का इस पर अलग-अलग विचार है कि क्या धूप और गर्मी वायरस के विकास और दीर्घायु को सीमित कर सकते हैं, वे सभी इस बात से सहमत हैं कि उचित स्वच्छता का पालन करना कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने अधिक प्रभावी है. हालांकि, कोरोनोवायरस को तीन चीजों के प्रति संवेदनशील माना जाता है: सूर्य का प्रकाश, उच्च तापमान और आर्द्रता. सूरज की रोशनी वायरस की क्षमता को प्रभावित करती है जबकि गर्मी इसे निष्क्रिय कर देती है।

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि गर्मियों में अभी एक महीना बाकी है और तब तक ट्रांसमिशन को रोकने के लिए सरल उपायों को अपनाना विवेकपूर्ण होगा:
– बीमार लगने वाले लोगों के संपर्क से बचें
– अपनी आंखों, नाक या मुंह को छूने की कोशिश न करें
– बीमार होने पर घर पर रहें
– छींकने पर मुंह को ढकें
– अल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें.
– समय-समय पर अपने हाथों को कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से धोते रहें।

द एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. पी. रघु राम ने कोरोना वायरस के गर्मी से निष्क्रिय होने पर अलग विचार रखे वह कहते हैं, “अगर कोरोना वायरस गर्मी से मरता तो ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर जैसे देशों में कोरोनावायरस की घटना कम होनी चाहिए थी. अभी भी बहुत कुछ है जो हमें नोवेल कोरोनोवायरस के बारे में जानने की जरूरत है.”
वह आगे कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की राय में भी हमें कोरोनोवायरस के प्रकोप को खत्म करने के लिए गर्म तापमान पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

(डॉ. लक्ष्मण जेसानी सलाहकार, संक्रामक रोग, अपोलो अस्पताल, नवी मुंबई)
(डॉ. पी. रघु राम द एसोसिएशन ऑफ़ सर्जन्स ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष हैं)

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