निधिवन में क्यों छिपी लड़की, कृष्ण लीला देखने के लिए या कुछ और? क्या हुआ उसके साथ जब गोस्वामी ने देखा?

भगवान कृष्ण के साक्षात दर्शन की आस लिए वृन्दावन आई पटना की युवती सोमवार की शाम निधिवन में छिपकर बैठ गई। सेवायत गोस्वामी ने युवती को वहां से चले जाने के लिए समझाया,लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ी रही। इसके बाद पुलिस बुलानी पड़ी जिसने, एक सामाजिक कार्यकर्ता की मदद से युवती को बाहर निकाला। पुलिस ने पटना में युवती के परिजनों को सूचना दी जो बुधवार को उसे अपने साथ ले गए।

डिग्री कालेज की प्रवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मी गौतम ने बताया कि युवती मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही है। वह स्वास्थ्य जांच के नाम पर पिता से डेढ़ हजार रुपये लेकर यहां वृंदावन आ गई। युवती ने उसने शनिवार-रविवार को भी मंदिर में रुकने का प्रयास किया। लेकिन पुजारियों ने रुकने नहीं दिया।

निधिवन राज मंदिर के सेवायत गोस्वामी भीकचंद ने बताया कि, ‘ठाकुर जी को शयन कराने के पश्चात मैं अक्सर वन का निरीक्षण करता हूं कि कहीं श्रद्धालु भगवद्दर्शन की लालसा के वशीभूत हो वहां छिपा तो नहीं रह गया है। सोमवार को भी जब उन्होंने युवती को वहां देखा तो पहले उसे समझाया, लेकिन उसके जिद पर अड़े रहने पर पुलिस की मदद लेनी पड़ी और ऐसा करना उनकी मजबूरी थी।

वृन्दावन कोतवाली प्रभारी ने बताया, ‘युवती पटना से आई थी। उसके पिता दाल के व्यापारी हैं। सोमवार को उसे निधि वन से बाहर निकालने के बाद महिला सामाजिक कार्यकर्ता की सुपुर्दगी में देकर पिता का इंतजार करने को कहा गया था। आज उसके पिता यहां पहुंचे तो युवती को उनके सुपुर्द कर दिया गया।

सदियों से मान्यता चली आ रही है कि इस वन में प्रतिदिन मध्य रात्रि के समय श्रीराधा-कृष्ण आते हैं और 16 हजार गोपियों के साथ रास रचाते हैं। इस अद्भुत वन के बारे में यह भी कहा जाता है कि यहां रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण बांसुरी बजाते हैं, जिसकी मधुर ध्वनि सुनी जा सकती है। श्री राधारानी और गोपियों के नुपुर की ध्वनि को भी सुना जा सकता है।

आस्था के प्रतीक निधिवन में एक रंग महल भी स्थापित है। माना जाता है कि रास के बाद यहां श्रीराधा-कृष्ण विश्राम करते हैं। यहां उनके विश्राम के लिए चंदन का पलंग लगाया जाता है। सुबह यहां बिस्तर को देखने से प्रतीत होता है कि यहां निश्चित ही कोई रात्रि विश्राम करने आया है। निधिवन में 16 हजार वृक्ष हैं जो आपस में गुंथे हुए हैं। मान्यता है कि यह ही रात में भगवान श्रीकृष्ण की 16 हजार रानियां बनकर उनके साथ रास रचाती हैं।

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