आपने बखरी की कोठरी के ताखा में जलती डेबरी देखी है??

यदि आपने बखरी की कोठरी के ताखा में जलती डेबरी देखी है,
दलान को समझा है,
ओसारा जानते हैं,
दुआरे पर कचहरी देखे हैं,
राम-राम के बेरा दूसरे के दुवारे पहुँच के चाय-पानी किये हैं,


दतुअन करने से पहले मुँह नहीं जुठारे हैं,
दिन में एक बार दाल-भात-तरकारी जरूर खाये हैं,
संझा माई की किरिया का मतलब समझते हैं,
बरम बाबा का अस्थान आपको मालूम है,
डीह बाबा के अस्थान पर गोड़ लगे हैं,
बसुला समझते हैं,
खंती जानते हैं,
कुदार-फरसा चलाये हैं,
सतमेरवन समझते हैं,


जुरजोधना का असली नाम दुर्योधन जानते हैं,
बारी-बगइचा की जिंदगी एंजाय किये हैं,
पोखरा-गड़ही किनारे बैठकर लंठई किये हैं,
गोहूँ, रहर, ऊख, छिम्मी, होरहा का मजा लिये हैं..
तो समझिये,
आप गाँव की महिमा जानते हैं..
और गजब की जिंदगी जिये हैं….।
भूख मुक्त का सपना ….
*भारत मुक्त अंतिम लक्ष्य …*
*।। दिव्य प्रणाम ।।*

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