Dharma & Karma 

वृषभ राशि के लोगों सकारात्मक-बहुत अच्छी स्थिति है। बहुत अच्छी एनर्जी भी है। बाकी राशियों का क्या??

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी धानिवबांग नालासोपारा पालघर महाराष्ट्र 🌹🙏
सम्पर्क सूत्र – 9518782511
🙏🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🙏
🙏🌹🙏 अथ पंचांगम् 🙏🌹🙏
🙏ll जय श्री राधे ll*🙏
🙏🌹🌷🌹🌷🌹🌷🌹🌷🙏

दिनाँक -: 08/01/2020,बुधवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
पौष
“””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि ——-त्रयोदशी 27:43:28 तक
पक्ष —————————शुक्ल
नक्षत्र ———रोहिणी 15:49:57
योग ————-शुक्ल 21:12:54
करण ——–कौलव 16:03:50
करण ———–तैतुल 27:43:28
वार ————————-बुधवार
माह —————————- पौष
चन्द्र राशि ——वृषभ 27:48:07
चन्द्र राशि ——————– मिथुन
सूर्य राशि ———————–धनु
रितु —————————-हेमंत
सायन ————————शिशिर
आयन ——————-दक्षिणायन
सायन ——————- उत्तरायण
संवत्सर ———————-विकारी
संवत्सर (उत्तर) ———-परिधावी
विक्रम संवत —————-2076
विक्रम संवत (कर्तक)——2076
शाका संवत —————–1941

मुम्बई
सूर्योदय —————–07:14:53
सूर्यास्त —————–18:15:06
दिन काल —————11:00:13
रात्री काल ————-12:59:59
चंद्रोदय —————–16:05:01
चंद्रास्त —————–29:37:51

लग्न —-धनु 23°5′ , 263°5′

सूर्य नक्षत्र —————-पूर्वाषाढा
चन्द्र नक्षत्र ——————रोहिणी
नक्षत्र पाया ——————–लोहा

          🌹  पद, चरण 🌹

वी —-रोहिणी 09:47:05

वु —-रोहिणी 15:49:57

वे —-मृगशीर्षा 21:50:16

वो —-मृगशीर्षा 27:48:07

            🌹ग्रह गोचर 🌹

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

सूर्य=धनु 23°32 ‘ पू oषा o, 3 फा
चन्द्र = वृषभ 18°23 ‘ रोहिणी ‘ 3 वी
बुध = धनु 21 °10 ‘ पूoषाo’ 3 फा
शुक्र= मकर 28°55, धनिष्ठा ‘ 2 गी
मंगल=वृश्चिक 09°40′ अनुराधा ‘ 2 नी
गुरु=धनु 13°30 ‘ पू oषाo , 1 भू
शनि=धनु 26°43′ उ oषा o ‘ 1 भे
राहू=मिथुन 13 °51 ‘ आर्द्रा , 3 ङ
केतु=धनु 13 ° 51′ पूo षाo, 1 भू

      🌹शुभा$शुभ मुहूर्त🌹

राहू काल 12:26 – 13:44 अशुभ
यम घंटा 08:31 – 09:49 अशुभ
गुली काल 11:07 – 12:26 अशुभ
अभिजित 12:05 -12:47 अशुभ
दूर मुहूर्त 12:05 – 12:47 अशुभ

🌹चोघडिया, दिन
लाभ 07:12 – 08:31 शुभ
अमृत 08:31 – 09:49 शुभ
काल 09:49 – 11:07 अशुभ
शुभ 11:07 – 12:26 शुभ
रोग 12:26 – 13:44 अशुभ
उद्वेग 13:44 – 15:02 अशुभ
चर 15:02 – 16:21 शुभ
लाभ 16:21 – 17:39 शुभ

🌹चोघडिया, रात
उद्वेग 17:39 – 19:21 अशुभ
शुभ 19:21 – 21:02 शुभ
अमृत 21:02 – 22:44 शुभ
चर 22:44 – 24:26* शुभ
रोग 24:26* – 26:07* अशुभ
काल 26:07* – 27:49* अशुभ
लाभ 27:49* – 29:31* शुभ
उद्वेग 29:31* – 31:12* अशुभ

नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

🌹दिशा शूल ज्ञान-------------उत्तर

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो पान अथवा पिस्ता खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

    🌹अग्नि वास ज्ञान 🌹

यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

   13 + 4 + 1 = 18  ÷ 4 = 2 शेष

आकाश लोक पर अग्नि वास हवन के लिए अशुभ कारक है l

     🌹शिव वास एवं फल🌹

13 + 13 + 5 = 31 ÷ 7 = 3 शेष

वृषभारूढ़ = शुभ कारक

🌹भद्रा वास एवं फल🌹

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

        🌹विशेष जानकारी🌹
  • प्रदोष व्रत (शिव पूजन)
  • रोहिणी व्रत
  • सर्वार्थ सिद्धि योग 🌹शुभ विचार 🌹

साधूनां दर्शनं पुण्यं तीर्थीभूता हि साधवः ।
कालेन फलते तीर्थं सद्यः साधुसमागमः ।।
।।चा o नी o।।

उसका सही में कल्याण हो जाता है जिसे भक्त के दर्शन होते है. भक्त में तुरंत शुद्ध करने की क्षमता है. पवित्र क्षेत्र में तो लम्बे समय के संपर्क से शुद्धि होती है.

         🌹 सुभाषितानि 🌹

गीता -: श्रद्धात्रयविभागयोग अo-17

कर्शयन्तः शरीरस्थं भूतग्राममचेतसः।,
मां चैवान्तःशरीरस्थं तान्विद्ध्‌यासुरनिश्चयान्‌॥,

जो शरीर रूप से स्थित भूत समुदाय को और अन्तःकरण में स्थित मुझ परमात्मा को भी कृश करने वाले हैं (शास्त्र से विरुद्ध उपवासादि घोर आचरणों द्वारा शरीर को सुखाना एवं भगवान्‌ के अंशस्वरूप जीवात्मा को क्लेश देना, भूत समुदाय को और अन्तर्यामी परमात्मा को ”कृश करना” है।,), उन अज्ञानियों को तू आसुर स्वभाव वाले जान॥,6॥,

🙏 व्रत पर्व विवरण 🙏

🌹 विशेष – त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र की हानि होती है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)

🌷 प्रणव’ (ॐ) की महिमा (चतुर्दशी आर्द्रा नक्षत्र योग : 09 जनवरी 2020 दोपहर 03:38 से रात्रि 02:35 तक)
🙏🏻 सूतजी ने ऋषियों से कहा : “महर्षियों ! ‘प्र’ नाम है प्रकृति से उत्पन्न संसाररूपी महासागर का | प्रणव इससे पार करने के लिए (नव) नाव है | इसलिए इस ॐकार को ‘प्रणव’ की संज्ञा देते हैं | ॐकार अपना जप करनेवाले साधकों से कहता है – ‘प्र –प्रपंच, न – नहीं है, व: – तुम लोगों के लिए |’ अत: इस भाव को लेकर भी ज्ञानी पुरुष ‘ॐ’ को ‘प्रणव’ नाम से जानते हैं | इसका दूसरा भाव है : ‘प्र – प्रकर्षेण, न – नयेत, व: -युष्मान मोक्षम इति वा प्रणव: | अर्थात यह तुम सब उपासकों को बलपूर्वक मोक्ष तक पहुँचा देगा|’ इस अभिप्राय से भी ऋषि-मुनि इसे ‘प्रणव’ कहते हैं | अपना जप करनेवाले योगियों के तथा अपने मंत्र की पूजा करनेवाले उपासको के समस्त कर्मो का नाश करके यह उन्हें दिव्य नूतन ज्ञान देता है, इसलिए भी इसका नाम प्रणव – प्र (कर्मक्षयपूर्वक) नव (नूतन ज्ञान देनेवाला) है |
🙏🏻 इस मायारहित महेश्वर को ही नव अर्थात नूतन कहते हैं | वे परमात्मा प्रधान रूप से नव अर्थात शुद्धस्वरुप है, इसलिए ‘प्रणव’ कहलाते हैं | प्रणव साधक को नव अर्थात नवीन (शिवस्वरूप) कर देता है, इसलिए भी विद्वान पुरुष इसे प्रणव के नाम से जानते हैं अथवा प्र – प्रमुख रूप से नव – दिव्य परमात्म – ज्ञान प्रकट करता है, इसलिए यह प्रणव है |
🙏🏻 यध्यपि जीवन्मुक्त के लिए किसी साधन की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वह सिद्धरुप है, तथापि दूसरों की दृष्टि में जब तक उसका शरीर रहता है, टीवी तक उसके द्वारा प्रणव – जप की सहज साधना स्वत: होती रहती है | वह अपनी देह का विलय होने तक सूक्ष्म प्रणव मंत्र का जप और उसके अर्थभूत परमात्म-तत्त्व का अनुसंधान करता रहता है | जो अर्थ का अनुसंधान न करके केवल मंत्र का जप करता है, उसे निश्चय ही योग की प्राप्ति होती है | जिसने इस मंत्र का ३६ करोड़ जप कर लिया हो, उसे अवश्य ही योग प्राप्त हो जाता है | ‘अ’ शिव है, ‘उ’ शक्ति है और ‘मकार’ इन दोनों की एकता यह त्रितत्त्वरूप है, ऐसा समझकर ‘ह्रस्व प्रणव’ का जप करना चाहिए | जो अपने समस्त पापों का क्षय करना चाहते हैं, उनके लिए इस ह्रस्व प्रणव का जप अत्यंत आवश्यक है |
🙏🏻 वेद के आदि में और दोनों संध्याओं की उपासना के समय भी ॐकार का उच्चारण करना चाहिए | भगवान शिव ने भगवान ब्रम्हाजी और भगवान विष्णु से कहा : “मैंने पूर्वकाल में अपने स्वरूपभूत मंत्र का उपदेश किया है, जो ॐकार के रूप में प्रसिद्ध है | वह महामंगलकारी मंत्र है | सबसे पहले मेरे मुख से ॐकार ( ॐ ) प्रकट हुआ, जो मेरे स्वरूप का बोध करानेवाला है | ॐकार वाचक है और मैं वाच्य हूँ | यह मंत्र मेरा स्वरुप ही है | प्रतिदिन ॐकार का निरंतर स्मरण करने से मेरा ही सदा स्मरण होता है |
🙏🏻 मुनीश्वरो ! प्रतिदिन दस हजार प्रणवमंत्र का जप करें अथवा दोनों संध्याओं के समय एक-एक हजार प्रणव का जप किया करें | यह क्रम भी शिवप्रद की प्राप्ति करानेवाला है |
🙏🏻 ‘ॐ’ इस मंत्र का प्रतिदिन मात्र एक हजार जप करने पर सम्पूर्ण मनोरथों की सिद्धि होती है |
🙏🏻 प्रणव के ‘अ’ , ‘उ’ और ‘म’ इन तीनों अक्षरों से जीव और ब्रम्ह की एकता का प्रतिपादन होता है – इस बात को जानकर प्रणव ( ॐ ) का जप करना चाहिए | जपकाल में यह भावना करनी चाहिए कि ‘हम तीनों लोकों की सृष्टि करनेवाले ब्रम्हा, पालन करनेवाले विष्णु तथा संहार करनेवाले रुद्र जो स्वयंप्रकाश चिन्मय हैं, उनकी उपसना करते हैं | यह ब्रम्हस्वरूप ॐकार हमारी कर्मन्द्रियों और ज्ञानेन्द्रियों की वृत्तियों को, मन की वृत्तियों को तथा बुद्धि की वृत्तियों को सदा भोग और मोक्ष प्रदान करनेवाले धर्म एवं ज्ञान की ओर प्रेरित करें | प्रणव के इस अर्थ का बुद्धि के द्वारा चिंतन करता हुआ जो इसका जप करता है, वह निश्चय ही ब्रम्ह को प्राप्त कर लेता है | अथवा अर्थानुसंधान के बिना भी प्रणव का नित्य जप करना चाहिए |

🙏🏻 (‘शिव पुराण’ अंतर्गत विद्धेश्वर संहिता से संकलित)


👉🏻 भिन्न-भिन्न काल में ‘ॐ’ की महिमा
🌹 आर्दा नक्षत्र से युक्त चतुर्दशी के योग में (दिनांक 09 जनवरी 2020 दोपहर 03:38 से रात्रि 02:35 तक) प्रणव का जप किया जाय तो वह अक्षय फल देनेवाला होता है |

मेष-
सकारात्मक-स्थिति ठीक है। चौतरफा अगर सारे ग्रहों का अध्ययन किया जाए तो किसी प्रकार का कोई जोखिम नहीं है। निरंतर आप आगे बढ़ रहे हैं।
नकारात्मक-थोड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। पूंजी निवेश अभी न करें।
प्रेम-अच्छी स्थिति है।
व्यवसाय-अच्छी स्थिति चल रही है।
सेहत-अच्छी स्थिति है।
उपाय-भगवान विष्णु का दर्शन जरूर करिए। भाग्य में बदलाव होगा।

वृषभ-
सकारात्मक-बहुत अच्छी स्थिति है। बहुत अच्छी एनर्जी है। इस एनर्जी का इस्तेमाल करके जो भी काम करेंगे उसमें निश्चित सफलता मिलेगी।
नकारात्मक-मानसिक चंचलता पर नियंत्रण रखें।
प्रेम-अच्छी स्थिति है।
व्यवसाय-अच्छी स्थिति है।
सेहत-अच्छी स्थिति है।
उपाय-पीली वस्तुओं जैसे चने की दाल का दान करें। स्थिति में और सुधार होगा।

मिथुन-
सकारात्मक-किसी तरह की कोई समस्या नहीं है।
नकारात्मक-थोड़ा चिंताकारी सृष्टि का सृजन हो रहा है। चिंतित बने रहेंगे। खर्च की अधिकता से परेशान रहेंगे।
प्रेम-अच्छी स्थिति है।
व्यवसाय-रोजी रोजगार में तरक्की कर रहे हैं। व्यवसायिक सफलता मिल रही है।
सेहत-सुधार की ओर अग्रसर हैं।
उपाय-यदि भगवान विष्णु का दान करें या विष्णु मंदिर में पीली चीज का दान करें तो और अच्छी स्थिति होगी।

कर्क-
सकारात्मक-आर्थिक स्थिति आपकी सुदृढ़ होती जा रही है। आशातीत सफलता आपको मिल रही है। अच्छे समाचार की प्राप्ति भी हो रही है। धन, यश, कीर्ति में व़ृद्धि हो रही है। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। नकारात्मक-अकारण चिंतित रहेंगे। प्रेम-अच्छी स्थिति है। व्यवसाय-व्यवसायिक स्थिति अच्छी चल रही है। सेहत-काली जी का दर्शन करें। मां भगवती के चरणों का आशीर्वाद लें और बेहतर स्थिति होगी।


सिंह-
सकारात्मक-शासन-सत्ता पक्ष का सहयोग मिल रहा है। कोर्ट कचहरी में विजय मिल रही है। अच्छी स्थिति में आप चल रहे हैं। नकारात्मक-थोड़ा तू-तू मैं-मैं सम्भव है। प्रेम-अच्छी स्थिति चल रही है। व्यवसाय-सफलता मिल रही है। सेहत-स्थिति सुधर रही है। उपाय-कुछ भी सफेद वस्तु खास दही का दान करते हैं तो बहुत अच्छा होगा।


कन्या-
सकारात्मक-भाग्यवर्धक दिनों का निर्माण होने लगा है। तृतीय घर में मंगल जाकर पराक्रमी बना रहा है आपको। किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है।
नकारात्मक-घर में थोड़ा तू-तू मैं-मैं की स्थिति जरूर बनी हुई है। प्रेम-अच्छी स्थिति है। व्यवसाय-दिनों दिन स्थिति सुधर रही है। सेहत-ठीक स्थिति है। शारीरिक-मानसिक दोनों स्थितियां ठीक हैं।
उपाय-कोई भी पीली वस्तु जैसे चने की दाल का दान करें।

तुला-
सकारात्मक-अब ठीक चलने लगा है। स्थिति में दिनोंदिन सुधार हो रहा है।
नकारात्मक-चंद्रमा के अष्टम भाव में जाने के चलते आज के दिन थोड़ी दिक्कत है आपको। चोट लग सकती है। किसी परेशानी में पड़ सकते हैं। प्रेम-अच्छी स्थिति है। व्यवसाय-अच्छी स्थिति है। सेहत-मध्यम स्थिति है।
उपाय-मां भगवती के चरणों में जाएं उनको प्रणाम करें अच्छा रहेगा।


वृश्चिक-
सकारात्मक-हर दृष्टि से बहुत अच्छा है। किसी प्रकार का कोई जोखिम नहीं है।
नकारात्मक-मानसिक चंचलता पर थोड़ा नियंत्रण रखें।
प्रेम-नवप्रेम का आगमन हो सकता है।
व्यवसाय-सफलता मिलेगी।
सेहत-सुधार होगा।
उपाय-केसर का तिलक लगाएं।

धनु-
सकारात्मक-दिनों दिन जोखिम से उबरते जा रहे हैं आप। विरोधी दबेंगे आप आगे बढ़ेंगे। आपमें रौब है। आपमें ओज है। विनम्रता है।
नकारात्मक-मन में स्पष्टता नहीं है।
प्रेम-पहले से अच्छी स्थिति है।
व्यवसाय-सफलता मिल रही है।
सेहत-पहले से अच्छी स्थिति है।
उपाय-हनुमान जी की शरण में जाएं और अच्छा होगा।


मकर-
सकारात्मक-निर्णय लेने की क्षमता बहुत अच्छी चल रही है।
नकारात्मक-द्वादश भाव में ग्रहों का जमावड़ा है। शनि भी द्वादश भाव में है। इससे उर्जा की कमी दिख रही है।
प्रेम-उम्दा स्थिति है।
व्यवसाय-ठीक स्थिति कही जाएगी।
सेहत-मध्यम स्थिति है।
उपाय-शनिदेव का दर्शन करें।

कुंभ-
सकारात्मक-घर में कुछ उत्सव सा माहौल दिख रहा है। भूमि, भवन, वाहन की खरीदारी, सम्पन्नता, मां के स्वास्थ्य में सुधार होगा। रुपए पैसे की स्थिति बड़ी अच्छी स्थिति है। शासन सत्ता पक्ष के करीब हैं। आगे बढ़ें।
नकारात्मक-घर में कुछ तू-तू मैं-मैं हो सकती है।
प्रेम-मध्यम स्थिति है।
व्यवसाय-बहुत अच्छी स्थिति है।
सेहत-अच्छी स्थिति है।
उपाय-सूर्यदेव को जल दें।

मीन-
सकारात्मक-यह समय कार्यों को करने वाला है। जो चाहते हैं कर डालिए। लक्ष्य को छूने वाले हैं। धैर्य बनाकर चलते रहिए। सारी स्थितियां ठीक दिख रही हैं।
नकारात्मक-अकारण थोड़ा ज्यादा सोचने लगेंगे।
प्रेम-अच्छी स्थिति है।
व्यवसाय-अच्छी स्थिति है।
सेहत-अच्छी स्थिति है।
उपाय-बजरंग बली का पूरा पूरा सहयोग मिल रहा है। उनके चरणों में जाएं, आशीर्वाद लें।

जिनका आज जन्मदिन है उनको हार्दिक शुभकामनाएं

दिनांक 8 को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 8 होगा। यह ग्रह सूर्यपुत्र शनि से संचालित होता है। इस दिन जन्मे व्यक्ति धीर गंभीर, परोपकारी, कर्मठ होते हैं। आपकी वाणी कठोर तथा स्वर उग्र है। आप भौतिकतावादी है। आप अदभुत शक्तियों के मालिक हैं। आप अपने जीवन में जो कुछ भी करते हैं उसका एक मतलब होता है। आपके मन की थाह पाना मुश्किल है। आपको सफलता अत्यंत संघर्ष के बाद हासिल होती है। कई बार आपके कार्यों का श्रेय दूसरे ले जाते हैं।
 
शुभ दिनांक : 8  17, 26
 
शुभ अंक : 8, 17, 26, 35, 44
शुभ वर्ष : 2021 2024, 2032

ईष्टदेव : हनुमानजी, शनि देवता

शुभ रंग : काला, गहरा नीला, जामुनी

कैसा रहेगा यह वर्ष
सभी कार्यों में सफलता मिलेगी। जो अभी तक बाधित रहे है वे भी सफल होंगे। व्यापार-व्यवसाय की स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरीपेशा व्यक्ति प्रगति पाएंगे। बेरोजगार प्रयास करें, तो रोजगार पाने में सफल होंगे। शत्रु वर्ग प्रभावहीन होंगे, स्वास्थ्य की दृष्टि से समय अनुकूल ही रहेगा। राजनैतिक व्यक्ति भी समय का सदुपयोग कर लाभान्वित होंगे।

🙏आपका दिन मंगलमय हो।

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