हर हर महादेव की कृपादृष्टि आप पर बनी रहे, साथ ही श्राद्ध की विशेष जानकारी और साथ में आज आपकी राशि क्या कहती है…

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी धानिवबांग नालासोपारा पालघर महाराष्ट्र 🌹🌹🙏
सम्पर्क सूत्र -9518782511
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🙏🙏 अथ पंचांगम् 🙏🙏

        ll जय श्री राधे ll

दिनाँक -: 16/09/2019,सोमवार
द्वितीया, कृष्ण पक्ष
आश्विन
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)

तिथि———–द्वितीया14:21:10 तक
पक्ष—————————–कृष्ण
नक्षत्र————–रेवती28:21:38
योग—————–वृद्वि22:52:16
करण————–गरज14:35:10
करण———–वाणिज27:35:56
वार————————–सोमवार
माह————————–आश्विन
चन्द्र राशि———मीन 28:21:38
चन्द्र राशि————————मेष
सूर्य राशि————————सिंह
रितु——————————-वर्षा
आयन——————-दक्षिणायण
संवत्सर———————-विकारी
संवत्सर (उत्तर)———–परिधावी
विक्रम संवत—————–2076
विक्रम संवत (कर्तक)——-2075
शाका संवत——————1941

मुम्बई
सूर्योदय—————–06:27:13
सूर्यास्त——————18:39:23
दिन काल—————12:16:21
रात्री काल————–11:44:05
चंद्रास्त——————07:59:38
चंद्रोदय——————20:14:36

लग्न—-सिंह28°46′ , 148°45′

सूर्य नक्षत्र———–उत्तराफाल्गुनी
चन्द्र नक्षत्र———————रेवती
नक्षत्र पाया———————स्वर्ण

        पद, चरण  

दे—-रेवती 08:24:39

दो—-रेवती 15:04:30

चा—-रेवती 21:43:31

ची—-रेवती 28:21:38

          ग्रह गोचर  

ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद

सूर्य=सिंह 28°42 ‘ उ o फा o, 1 टे
चन्द्र =मीन 18°23 ‘ रेवती ‘ 1 दे
बुध=कन्या 08°26 ‘उo फ़ा o’ 4 पी
शुक्र= कन्या 07°13, उ oफा o’ 3 पा
मंगल=सिंह 24°12 ‘ पू oफ़ा o ‘ 4 टू
गुरु=वृश्चिक 22°21 ‘ ज्येष्ठा , 2 या
शनि=धनु 22°13′ पू oषा o ‘ 3 फा
राहू=मिथुन 19°51 ‘ आर्द्रा , 4 छ
केतु=धनु 19 ° 51′ पूo षाo, 2 धा

     शुभा$शुभ मुहूर्त

राहू काल 07:38 – 09:10अशुभ
यम घंटा 10:42 – 12:14अशुभ
गुली काल 13:46 – 15:18अशुभ
अभिजित 11:49 -12:39शुभ
दूर मुहूर्त 12:39 – 13:28अशुभ
दूर मुहूर्त 15:06 – 15:55अशुभ

🌹गंड मूलअहोरात्रअशुभ

🌹पंचक06:06 – 28:22*अशुभ

     चोघडिया, दिन

अमृत 06:06 – 07:38शुभ
काल 07:38 – 09:10अशुभ
शुभ 09:10 – 10:42शुभ
रोग 10:42 – 12:14अशुभ
उद्वेग 12:14 – 13:46अशुभ
चर 13:46 – 15:18शुभ
लाभ 15:18 – 16:50शुभ
अमृत 16:50 – 18:22शुभ

    चोघडिया, रात

चर 18:22 – 19:50शुभ
रोग 19:50 – 21:18अशुभ
काल 21:18 – 22:46अशुभ
लाभ 22:46 – 24:14शुभ उद्वेग 24:14 – 25:42अशुभ शुभ 25:42 – 27:10शुभ अमृत 27:10 – 28:38शुभ चर 28:38 – 30:06*शुभ

🌹होरा, दिन
चन्द्र 06:06 – 07:07
शनि 07:07 – 08:09
बृहस्पति 08:09 – 09:10
मंगल 09:10 – 10:11
सूर्य 10:11 – 11:13
शुक्र 11:13 – 12:14
बुध 12:14 – 13:15
चन्द्र 13:15 – 14:17
शनि 14:17 – 15:18
बृहस्पति 15:18 – 16:19
मंगल 16:19 – 17:21
सूर्य 17:21 – 18:22

🌹होरा, रात
शुक्र 18:22 – 19:21
बुध 19:21 – 20:20
चन्द्र 20:20 – 21:18
शनि 21:18 – 22:17
बृहस्पति 22:17 – 23:16
मंगल 23:16 – 24:14
सूर्य 24:14* – 25:13
शुक्र 25:13* – 26:12
बुध 26:12* – 27:10
चन्द्र 27:10* – 28:09
शनि 28:09* – 29:08
बृहस्पति 29:08* – 30:06

नोट— दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।

दिशा शूल ज्ञान-------------पूर्व*

परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा काजू खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll

🌹 अग्नि वास ज्ञान
यात्रा विवाहे व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।

  15 + 1 + 2 + 1 = 19 ÷ 4 = 3 शेष

पृथ्वी लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

     शिव वास एवं फल 

17 + 17 + 5 = 39 ÷ 7 = 4 शेष

सभायां = सन्ताप कारक

      भद्रा वास एवं फल 

स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।

रात्रि 27:37 से प्रारम्भ

मृत्यु लोक = सर्वकार्य विनाशिनी

       विशेष जानकारी    
  • द्वितीया श्राध्द
  • गुरु अमरदास ,रामदास पुण्य तिथि शुभ विचार

स्वयं कर्म करोत्यत्मा स्वयं तत्फलमश्नुते ।
स्वयं भ्रमति संसारे स्वयं तस्माद्विमुच्यते ।।
।।चा o नी o।।

जीवात्मा अपने कर्म के मार्ग से जाता है. और जो भी भले बुरे परिणाम कर्मो के आते है उन्हंं भोगता है. अपने ही कर्मो से वह संसार में बंधता है और अपने ही कर्मो से बन्धनों से छूटता है.

          सुभाषितानि  

गीता -: क्षेत्रज्ञविभागयोग अo-13

इच्छा द्वेषः सुखं दुःखं सङ्‍घातश्चेतना धृतिः ।,
एतत्क्षेत्रं समासेन सविकारमुदाहृतम्‌ ॥,

तथा इच्छा, द्वेष, सुख, दुःख, स्थूल देहका पिण्ड, चेतना (शरीर और अन्तःकरण की एक प्रकार की चेतन-शक्ति।,) और धृति (गीता अध्याय 18 श्लोक 34 व 35 तक देखना चाहिए।,)– इस प्रकार विकारों (पाँचवें श्लोक में कहा हुआ तो क्षेत्र का स्वरूप समझना चाहिए और इस श्लोक में कहे हुए इच्छादि क्षेत्र के विकार समझने चाहिए।,) के सहित यह क्षेत्र संक्षेप में कहा गया॥,6॥,

आचार्य रमेश चन्द्र तिवारी धानिवबांग नालासोपारा पालघर महाराष्ट्र 🌹🌹🙏

🚩 व्रत पर्व विवरण – द्वितीया का श्राद्ध

🌷 श्राद्ध के दिन 🌷
🙏🏻 जिस दिन आप के घर में श्राद्ध हो उस दिन गीता का सातवें अध्याय का पाठ करें । पाठ करते समय जल भर के रखें । पाठ पूरा हो तो जल सूर्य भगवन को अर्घ्य दें और कहें की हमारे पितृ के लिए हम अर्पण करते हें। जिनका श्राद्ध है , उनके लिए आज का गीता पाठ अर्पण।


🌷 श्राद्ध कर्म 🌷
🚩 अगर पंडित से श्राद्ध नहीं करा पाते तो सूर्य नारायण के आगे अपने बगल खुले करके (दोनों हाथ ऊपर करके) बोलें :
🌞 “हे सूर्य नारायण ! मेरे पिता (नाम), अमुक (नाम) का बेटा, अमुक जाति (नाम), (अगर जाति, कुल, गोत्र नहीं याद तो ब्रह्म गोत्र बोल दे) को आप संतुष्ट/सुखी रखें । इस निमित मैं आपको अर्घ्य व भोजन कराता हूँ ।” ऐसा करके आप सूर्य भगवान को अर्घ्य दें और भोग लगायें ।
🌷 तुलसी 🌷
🌿 *श्राद्ध और यज्ञ आदि कार्यों में तुलसी का एक पत्ता भी महान पुण्य देनेवाला है |
🌷 *श्राद्ध के लिए विशेष मंत्र* 🌷
🙏 ” ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वधादेव्यै स्वाहा । “
🚩 इस मंत्र का जप करके हाथ उठाकर सूर्य नारायण को पितृ की तृप्ति एवं सदगति के लिए प्रार्थना करें । स्वधा ब्रह्माजी की मानस पुत्री हैं । इस मंत्र के जप से पितृ की तृप्ति अवश्य होती है और श्राद्ध में जो त्रुटी रह गई हो वे भी पूर्ण हो जाती है।
श्राद्ध में करने योग्य 🌷
🙏 श्राद्ध पक्ष में १ माला रोज द्वादश मंत्र ” ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” की करनी चाहिए और उस माला का फल नित्य अपने पितृ को अर्पण करना चाहिए।
l


🚩श्राद्ध विशेष* 🚩

🚩पूर्वजों को पितर पक्ष में इस मंत्र के द्वारा सूर्य भगवान को अर्ध्य देने से यमराज प्रसन्न होकर पूर्वजों को अच्छी जगह भेज देते हैं ।*
🚩 ॐ धर्मराजाय नमः ।
🚩 ॐ महाकालाय नमः ।
🚩 ॐ म्रर्त्युमा नमः ।
🚩 ॐ दानवैन्द्र नमः ।
🚩 ॐ अनन्ताय नमः ।
पितृ पक्ष 🚩
🚩धर्म ग्रंथों के अनुसार, विधि-विधान पूर्वक श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वर्तमान समय में देखा जाए तो विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करने में धन की आवश्यकता होती है। पैसा न होने पर विधिपूर्वक श्राद्ध नहीं किया जा सकता। ऐसे में पितृ दोष होने से कई प्रकार की समस्याएं जीवन में बनी रहती हैं। पुराणों के अनुसार, ऐसी स्थिति में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर कुछ साधारण उपाय करने से भी पितर तृप्त हो जाते हैं।*
🚩न कर पाएं श्राद्ध तो करें इनमें से कोई 1 उपाय, नहीं होगा पितृ दोष*
🚩जिस स्थान पर आप पीने का पानी रखते हैं, वहां रोज शाम को शुद्ध घी का दीपक लगाएं। इससे पितरों की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी। इस बात का ध्यान रखें कि वहां जूठे बर्तन कभी न रखें।*
🚩सर्व पितृ अमावस्या के दिन चावल के आटे के 5 पिंड बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में बहा दें।*
🚩गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर उस पर गूगल के साथ घी, जौ, तिल व चावल मिलाकर घर में धूप करें।*
🚩विष्णु भगवान के किसी मंदिर में सफेद तिल के साथ कुछ दक्षिणा (रुपए) भी दान करें।*
🚩कच्चे दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में बहा दें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।*
🚩श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराएं या सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, सब्जी और दक्षिणा दान करें।*
🚩श्राद्ध नहीं कर सकते तो किसी नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृ दोष में कमी आती है।*
🚩श्राद्ध पक्ष में किसी विद्वान ब्राह्मण को एक मुट्ठी काले तिल दान करने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।
🚩श्राद्ध पक्ष में पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें। इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।*
🙏🏻 सूर्यदेव को अर्ध्य देकर प्रार्थना करें कि आप मेरे पितरों को श्राद्धयुक्त प्रणाम पहुँचाए और उन्हें तृप्त करें।


🌹व्रत पर्व विवरण –
🌹विशेष – द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)*
जानिए पुराणों के अनुसार श्राद्ध का महत्व*🌷
🙏 *कुर्मपुराण : कुर्मपुराण में कहा गया है कि ‘जो प्राणी जिस किसी भी विधि से एकाग्रचित होकर श्राद्ध करता है, वह समस्त पापों से रहित होकर मुक्त हो जाता है और पुनः संसार चक्र में नहीं आता।’*
🙏 गरुड़ पुराण : इस पुराण के अनुसार ‘पितृ पूजन (श्राद्धकर्म) से संतुष्ट होकर पितर मनुष्यों के लिए आयु, पुत्र, यश, स्वर्ग, कीर्ति, पुष्टि, बल, वैभव, पशु, सुख, धन और धान्य देते हैं।


🙏 मार्कण्डेय पुराण : इसके अनुसार ‘श्राद्ध से तृप्त होकर पितृगण श्राद्धकर्ता को दीर्घायु, सन्तति, धन, विद्या सुख, राज्य, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करते हैं।
🙏 ब्रह्मपुराण : इसके अनुसार ‘जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति से श्राद्ध करता है, उसके कुल में कोई भी दुःखी नहीं होता।’ साथ ही ब्रह्मपुराण में वर्णन है कि ‘श्रद्धा एवं विश्वास पूर्वक किए हुए श्राद्ध में पिण्डों पर गिरी हुई पानी की नन्हीं-नन्हीं बूंदों से पशु-पक्षियों की योनि में पड़े हुए पितरों का पोषण होता है। जिस कुल में जो बाल्यावस्था में ही मर गए हों, वे सम्मार्जन के जल से तृप्त हो जाते हैं।
श्राद्ध में क्या करें क्या ना करें
🌷 श्राद्ध एकान्त में ,गुप्तरुप से करना चाहिये, पिण्डदान पर दुष्ट मनुष्यों की दृष्टि पडने पर वह पितरों को नहीं पहुचँता, दूसरे की भूमि पर श्राद्ध नहीं करना चाहिये, जंगल, पर्वत, पुण्यतीर्थ और देवमंदिर ये दूसरे की भूमि में नही आते, इन पर किसी का स्वामित्व नहीं होता, श्राद्ध में पितरों की तृप्ति ब्राह्मणों के द्वारा ही होती है, श्राद्ध के अवसर पर ब्राह्मण को निमन्त्रित करना आवश्यक है, जो बिना ब्राह्मण के श्राद्ध करता है, उसके घर पितर भोजन नहीं करते तथा श्राप देकर लौट जाते हैं, ब्राह्मणहीन श्राद्ध करने से मनुष्य महापापी होता है | (पद्मपुराण, कूर्मपुराण, स्कन्दपुराण )
🌷 श्राद्ध के द्वारा प्रसन्न हुये पितृगण मनुष्यों को पुत्र, धन, आयु, आरोग्य, लौकिक सुख, मोक्ष आदि प्रदान करते हैं , श्राद्ध के योग्य समय हो या न हो, तीर्थ में पहुचते ही मनुष्य को सर्वदा स्नान, तर्पण और श्राद्ध करना चाहिये,
शुक्ल पक्ष की अपेक्षा कृष्ण पक्ष और पूर्वाह्न की अपेक्षा अपराह्ण श्राद्ध के लिये श्रेष्ठ माना जाता है | (पद्मपुराण, मनुस्मृति)


🌷 सायंकाल में श्राद्ध नहीं करना चाहिये, सायंकाल का समय राक्षसी बेला नाम से प्रसिद्ध है, चतुर्दशी को श्राद्ध करने से कुप्रजा (निन्दित सन्तान) पैदा होती है, परन्तु जिसके पितर युद्ध में शस्त्र से मारे गये हो, वे चतुर्दशी को श्राद्ध करने से प्रसन्न होते हैं, जो चतुर्दशी को श्राद्ध करने वाला स्वयं भी युद्ध का भागी होता है | (स्कन्दपुराण, कूर्मपुराण, महाभारत)
🌷 *रात्रि में श्राद्ध नहीं करना चाहिये, उसे राक्षसी कहा गया है, दोनो संध्याओं में भी श्राद्ध नहीं करना चाहिये, दिन के आठवें भाग (महूर्त) में जब सूर्य का ताप घटने लगता है उस समय का नाम ‘कुतप’ है, उसमें पितरों के लिये दिया हुआ दान अक्षय होता है, कुतप, खड्गपात्र, कम्बल, चाँदी , कुश, तिल, गौ और दौहित्र ये आठो कुतप नाम से प्रसिद्ध है, श्राद्ध में तीन वस्तुएँ अत्यन्त पवित्र हैं, दौहित्र, कुतपकाल, तथा तिल, श्राद्ध में तीन वस्तुएँ अत्यन्त प्रशंसनीय हैं, बाहर और भीतर की शुद्धि, क्रोध न करना तथा जल्दबाजी न करना
🙏🙏🚩🚩🙏🙏🚩🚩🙏🙏

Presents
     दैनिक राशिफल

देशे ग्रामे गृहे युद्धे सेवायां व्यवहारके।
नामराशेः प्रधानत्वं जन्मराशिं न चिन्तयेत्।।
विवाहे सर्वमाङ्गल्ये यात्रायां ग्रहगोचरे।
जन्मराशेः प्रधानत्वं नामराशिं न चिन्तयेत ।।

🐏मेष
लाभ के अवसर अचानक बनेंगे। भाग्य का साथ मिलेगा। पुराने किए गए प्रयासों का लाभ अब मिल सकता है। सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। यश बढ़ेगा। आय में वृद्धि के योग हैं। चोट व रोग की तरफ से सावधानी रखें। भय रहेगा।

🐂वृष
फालतू खर्च पर नियंत्रण रखें। चिंता रहेगी। घर में मेहमानों का आवागमन रहेगा। शुभ समाचार प्राप्त होंगे। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। शेयर मार्केट व म्युचुअल फंड में लाभ होगा। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। जल्दबाजी न करें।

👫मिथुन
लेन-देन में जल्दबाजी तथा कार्य करते समय लापरवाही न करें। बेरोजगारी दूर करने के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। सट्टे व लॉटरी से दूर रहें। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा।

🦀कर्क
शारीरिक कष्ट से कार्य में बाधा उत्पन्न हो सकती है। वाणी पर नियंत्रण रखें। कुसंगति से हानि होगी। स्वास्थ्य पर खर्च होगा। आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। चिंता तथा तनाव रहेंगे। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। व्यापार ठीक चलेगा।

🐅सिंह
सुख के साधन जुटेंगे। बकाया वसूली के प्रयास सफल रहेंगे। व्यावसायिक यात्रा सफल रहेगी। आय में वृद्धि होगी। नौकरी में प्रभाव बढ़ेगा। उत्साह व प्रसन्नता से कार्य कर पाएंगे। पारिवारिक चिंता रहेगी। प्रतिद्वंद्विता बढ़ेगी। सावधान रहें।

🙍कन्या
लाभ में वृद्धि होगी। नए कार्यकारी अनुबंध हो सकते हैं। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। समाजसेवा करने की प्रेरणा प्राप्त होगी। मान-सम्मान मिलेगा। व्यापार-व्यवसाय मनोनुकूल चलेगा। निवेश शुभ रहेगा। जोखिम न लें।

⚖तुला
दुष्टजनों को पहचानना आवश्यक है। उनसे दूर रहने के प्रयास करें। किसी धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त हो सकता है। सत्संग का लाभ प्राप्त होगा। कोर्ट-कचहरी व सरकारी कार्यालयों में काम अनुकूल रहेंगे। लाभ के अवसर हाथ आएंगे।

🦂वृश्चिक
कोई पुराना रोग उभर सकता है। वाहन व मशीनरी इत्यादि के प्रयोग में लापरवाही न करें। शारीरिक हानि की आशंका प्रबल है। दूसरों के कार्य में हस्तक्षेप न करें। विवाद की आशंका है। शत्रु सामना नहीं कर पाएंगे। लाभ होगा। नौकरी में तनाव रहेगा।

🏹धनु
किसी व्यक्ति के व्यवहार से स्वाभिमान को चोट पहुंच सकती है। जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होगा। कानूनी अड़चन दूर होगी। आय में वृद्धि होगी। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। नौकरी में अधीनस्थों का सहयोग प्राप्त होगा। उत्साह व प्रसन्नता बने रहेंगे।

🐊मकर
पारिवारिक सुख-शांति बनी रहेगी। प्रेम-प्रसंग अनुकूल रहेंगे। भागदौड़ रहेगी। लाभ में कमी हो सकती है। स्थायी संपत्ति की खरीद-फरोख्त की योजना बनेगी। कारोबार अच्छा चलेगा। रोजगार में वृद्धि होगी। कोई बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है। लापरवाही न करें।

🍯कुंभ
किसी मनोरंजक आनंददायी यात्रा की योजना बनेगी। विद्यार्थी वर्ग सफलता हासिल करेगा। रचनात्मक कार्यों में रुचि जागृत होगी। स्वादिष्ट भोजन का आनंद प्राप्त होगा। व्यापार-व्यवसाय अच्छा चलेगा। घर-बाहर जीवन सुखमय व्यतीत होगा।

🐟मीन
कानूनी अड़चन का सामना करना पड़ सकता है। वाणी में हल्के शब्दों के प्रयोग से बचें। विवाद हो सकता है। दु:खद समाचार की प्राप्ति संभव है। कीमती वस्तुएं संभालकर रखें। पुराना रोग परेशानी का कारण बन सकता है। व्यापार-व्यवसाय से लाभ होगा।

🙏आपका दिन मंगलमय हो🙏

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