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रियल एस्टेट ब्रोकर मनीष मेहता को इस लाकड़ाउन में लगा 3 लाख 90 हजार का चूना…

पुलिस द्वारा बार-बार संदिग्ध ससपीसीयस लिंक पर क्लिक करने या धोखाधड़ी वाले फोन संदेशों से लुभाने वालों से दूर रहने की अपील के बावजूद, नही बच पाए मीरा भायंदर के रियल स्टेट ब्रोकर मेहता।

जी हाँ, काशीमीरा पुलिस स्टेशन ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति का वितरण करने) के तहत अपराध दर्ज किया है और अज्ञात लोगों के खिलाफ़ सोमवार को अपराध के पंजीकरण के बाद जांच पड़ताल भी स्टार्ट कर दिया है।

काशीमीरा पुलिस के अनुसार मामला ये है कि काशीमीरा के शांति गार्डन इलाके के न्यू म्हाडा कॉलोनी में रहने वाले रियल एस्टेट ब्रोकर मनीष मेहता को रविवार को उनके मोबाइल फोन पर एसएमएस आया उसके अनुसार, मेहता को बैंक से संपर्क करने के लिए कहा गया और कारण था उनका खाता निम्न कारणों से बंद हो जाएगा। हालांकि मेहता ने पहले इस मैसेज को नजरअंदाज कर दिया था, परंतु जब यह मैसेज दूसरी बार आया, तो उन्होंने उस नंबर पर कॉल करने का प्रयास किया जिसका एसएमएस में उल्लेख किया गया था। उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होने नज़रंदाज़ कर दिया।

फिर थोड़ी देर बाद किसी ने मेहता को कॉल किया और अपने को बैंक का कर्मचारी होने का दावा किया कि मैं बैंक से बोल रहा हूँ। पोलीस ऑफिसर ने बताया कि अज्ञात कॉल करने वाले ने एकाउंट अपडेट करने के लिए मेहता को खाते का ब्योरा देने के लिए कहा तो मेहता ने बगैर सावधानी बरतें ये गलती कर बैठे और अकॉउंट से संबंधित सभी चीजें शेयर कर दिए। विवरण प्राप्त करने के कुछ ही मिनटों के भीतर, घोटालेबाजों ने मेहता के अकाउंट से 3 लाख 98 हजार खाली कर दिए क्योंकि उस अकॉउंट में कुल उतनी ही राशि थी।

बैंक द्वारा एसएमएस एलर्ट की सुविधा होने के कारण उनको इस ट्रांजेक्शन का एलर्ट मिला कि उनके अकॉउंट से ये ट्रांजेक्शन हुआ तो मेहता के होश उड़ गए। और उनको समझ में आ गया कि हमको किसी ने चुना लगा दिया।

तब उन्होंने काशिमिरा पुलिस स्टेशन पहुंचे और फिर मेहता ने पुलिस को आप बीती बताया कि वह अपने घर में कोरोना को लेकर उसकी स्थिति परिस्थिति से पहले से ही परेशान और चिंतित थे तो उन्होंने इधर ध्यान ही नही दे पाए और उनकी छोटी सी गलती का खामियाजा इतना बड़ा भुगतान करके करना पड़ा, इसलिए इस खबर से आप पढ़ने वालों से गुजारिश है कि किसी भी कॉल या एसएमएस को ऐसे ही रेस्पॉन्स न दें, पहले जांचे परखें तब कोई प्रतिक्रिया दें या करें।

इन सब इंसीडेंट को देखते हुए काशीमीरा पुलिस ने अपने इलाके में लोगों को इस तरह के संदिग्ध संदेशों और लिंक से दूर रखने के लिए शिक्षित करने के लिए एक अभियान शुरू करने की योजना बना रही है क्योंकि जालसाज लोग लॉकडाउन के दौरान लोगों द्वारा इंटरनेट के उपयोग पर नज़र लगाकर ओवरटाइम काम कर रहे हैं ताकि दूसरों का अकॉउंट खाली कर सकें। ऐसे में पुलिस जनता को इन जालसाजों से बचाने के मक़सद से की कोई दुसरा इनका शिकार ना बने यह अभियान चलाने की सोंच रही है और हैम इतना ही कहेंगे कि पुलिस की यह मुहिम काबिले तारीफ होगी।

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