सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ FIR कराने वाले को हाईकोर्ट से नही मिली राहत…

इंडिया फैशन एंड ब्यूटी एवार्ड नाम से इवेंट कंपनी चलाने वाले मुरादाबाद के प्रमोद शर्मा ने इसी साल फरवरी महीने में सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ धोखाधड़ी व पैसे हड़पने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी.

अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ मुरादाबाद में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराने वाले इवेंट मैनेजर प्रमोद शर्मा को आज इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है. अदालत ने सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ पुलिस को जल्द से जल्द कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का आदेश देने से इंकार कर दिया है.

अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि याचिकाकर्ता निचली अदालत में अपील करने के बजाय सीधे हाईकोर्ट आ गया है. उसे निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए था. अदालत ने इस मामले में कोई दखल देने से इंकार करते हुए मुरादाबाद की जिला कोर्ट में अर्जी दाखिल करने को कहा है.

इंडिया फैशन एंड ब्यूटी एवार्ड नाम से इवेंट कंपनी चलाने वाले मुरादाबाद के प्रमोद शर्मा ने इसी साल फरवरी महीने में सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ धोखाधड़ी व पैसे हड़पने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी.

मुरादाबाद के कटघर थाने में दर्ज एफआईआर में सोनाक्षी सिन्हा पर उनतीस लाख रूपये लेने के बावजूद दिल्ली में आयोजित शो में नहीं आने की बात कही थी. आरोप था कि सोनाक्षी सिन्हा के शो में नहीं आने से उसे सैंतीस लाख रूपये का नुकसान हुआ था. प्रमोद शर्मा ने ज़हर खाकर जान देने की भी कोशिश की थी. इस मामले में सोनाक्षी सिन्हा को आठ मार्च को हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी. हाईकोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी.

इस मामले में मुरादाबाद पुलिस ने सितम्बर महीने में अपनी जांच पूरी कर ली थी. हालांकि पुलिस ने अभी तक न तो चार्जशीट दाखिल की है और न ही सोनाक्षी को क्लीन चिट देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगाई है.

एफआईआर दर्ज कराने वाले प्रमोद शर्मा का आरोप है कि पुलिस सोनाक्षी सिन्हा के रसूख के चलते कोई चार्जशीट दाखिल नहीं कर रही है. याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्ट में पुलिस रिपोर्ट दाखिल नहीं होने से मामले की सुनवाई शुरू नहीं हो पा रही है और इससे उसका नुकसान हो रहा है.

प्रमोद ने हाईकोर्ट में अर्जी दाख़िल कर जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने या फिर फाइनल रिपोर्ट लगाने का आदेश दिए जाने की अपील की थी. मामले की सुनवाई आज जस्टिस नाहिद आरा मूनिस और जस्टिस एनके जौहरी की बेंच में हुई. अदालत ने इस मामले में सीधे कोई दखल देने से इंकार करते हुए मुरादाबाद कोर्ट जाने की सलाह दी है.

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